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इस बार खरमास, मलमास और शुक्रास्त के कारण टुकड़ों में बजेगी शहनाई, 2026 में रुक-रुक कर मिलेंगे विवाह मुहूर्त

Published on: January 30, 2026
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जागृत भारत | वाराणसी(Varanasi): वर्ष 2026 में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त लगातार नहीं, बल्कि रुक-रुक कर और कई चरणों में उपलब्ध होंगे। इस वर्ष खरमास, मलमास, शुक्रास्त और चातुर्मास जैसे ज्योतिषीय अवरोधों के कारण विवाह के आयोजन में कई बार विराम देखने को मिलेगा।

जनवरी में पूरी तरह नहीं मिला कोई विवाह मुहूर्त

ज्योतिषियों के अनुसार, जनवरी 2026 का पूरा महीना विवाह मुहूर्त से रहित रहा। इस दौरान शुक्रास्त की स्थिति के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया, जिससे परिवारों को फरवरी का इंतजार करना पड़ा।

फरवरी से 15 मार्च तक मिलेंगे शुभ लग्न, कुल 20 दिन मुहूर्त

शुक्रोदय 1 फरवरी को होगा, जिसके बाद 2 और 3 फरवरी को बाल्यावस्था के कारण विवाह मुहूर्त मान्य नहीं होंगे। 4 फरवरी से शुभ विवाह लग्नों की शुरुआत होगी, जो 15 मार्च तक जारी रहेंगे। इस अवधि में कुल 20 दिन विवाह के लिए विशेष रूप से शुभ माने गए हैं।

15 मार्च से खरमास, फिर 15 अप्रैल से दोबारा शुभ समय

15 मार्च से खरमास का आरंभ होगा, जिसके चलते विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर एक बार फिर रोक लग जाएगी। इसके बाद 15 अप्रैल से शुभ मुहूर्तों की पुनः शुरुआत होगी, जो 17 मई तक उपलब्ध रहेंगे।

17 मई से 15 जून तक मलमास, फिर विवाह पर रोक

17 मई से मलमास का आरंभ होगा, जो 15 जून तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जिससे फिर से शादियों पर ब्रेक लगेगा।

मध्य जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक फिर बजेगी शहनाई

मध्य जून के बाद विवाह के लग्न पुनः शुरू होंगे और जुलाई के पहले सप्ताह तक शुभ मुहूर्त मिलेंगे। इसके बाद चातुर्मास की शुरुआत होगी, जिसके चलते फिर विवाह कार्य स्थगित हो जाएंगे।

नवंबर से दोबारा शुरू होगा विवाह का सीजन

चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर से विवाह के गीत फिर गूंजेंगे। इसके साथ ही वर्ष के अंत तक शादियों का बड़ा सीजन देखने को मिलेगा।

ज्योतिषियों की सलाह: शादी की योजना सोच-समझकर बनाएं

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस वर्ष विवाह मुहूर्तों में बार-बार अवरोध आने के कारण परिवारों को शादी की योजना बेहद सावधानीपूर्वक बनानी चाहिए। जनवरी में मुहूर्त न होने के कारण फरवरी से शुरू होने वाला पहला चरण महत्वपूर्ण रहेगा, जबकि अप्रैल-मई और जून-जुलाई के छोटे चरणों में भीड़ अधिक रह सकती है।

धार्मिक मान्यताओं का प्रभाव

खरमास, मलमास और चातुर्मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन अवधियों में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को परंपरागत रूप से वर्जित माना जाता है। इसी कारण 2026 में विवाह सीजन कई चरणों में विभाजित रहेगा।

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