जागृत भारत,नई दिल्ली : राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को संसद में डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए इसे मरीजों के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में मरीजों को जानबूझकर विशेष डायग्नोस्टिक सेंटर भेजा जाता है, जहां से डॉक्टरों को कथित तौर पर कमीशन मिलता है।
सदन में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच “रेफरल इंसेंटिव” और “कट मनी अरेंजमेंट” जैसी व्यवस्था चल रही है। उनके अनुसार, यह एक अनौपचारिक तंत्र बन चुका है, जिसमें मरीजों को रेफर करने के बदले डॉक्टरों को निश्चित राशि या अन्य लाभ दिए जाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि मेडिकल प्रोफेशन की भाषा में इसे “डॉक्टर रेफरल कमीशन” कहा जाता है, जबकि डायग्नोस्टिक सेंटर अपने खातों में इसे “मार्केटिंग एक्सपेंस” के रूप में दर्ज करते हैं। चड्ढा ने आरोप लगाया कि कई मामलों में यह कमीशन जांच की कुल लागत के प्रतिशत के रूप में दिया जाता है और कुछ स्थानों पर डॉक्टरों को विदेश यात्राओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
मेडिकल नियमों का किया जिक्र
राघव चड्ढा ने कहा कि 2002 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के कोड ऑफ एथिक्स रेगुलेशन के तहत इस तरह की फीस स्प्लिटिंग पर रोक लगाई गई थी। इसके बाद 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर रेगुलेशन, 2023 में भी रेफरल कमीशन को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया और उल्लंघन की स्थिति में एक से तीन महीने तक निलंबन का प्रावधान किया।
‘मरीजों पर पड़ता है आर्थिक बोझ’
सांसद ने कहा कि इस कथित कमीशन का खर्च डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं उठाते, बल्कि इसे जांच के बिल में जोड़कर मरीजों से वसूला जाता है। उन्होंने इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स का हवाला देते हुए दावा किया कि इस वजह से कई मामलों में मरीजों का मेडिकल बिल 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
‘डॉक्टरों के नहीं, व्यवस्था के खिलाफ हैं’
राघव चड्ढा ने कहा कि उनकी मांग डॉक्टरों के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित “कट मनी रेफरल सिस्टम” के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश डॉक्टर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ मरीजों का इलाज करते हैं और समाज में उनका स्थान बेहद सम्मानजनक है। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि कुछ डॉक्टर इस कथित रेफरल व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं, जिससे अनावश्यक मेडिकल जांच और ओवर-रेफरल जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
सांसद ने सरकार से इस कथित व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई करने और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
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