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भारत-इंडोनेशिया की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती, सबांग पोर्ट विकास पर सहमति से बढ़ेगा समुद्री व्यापार और सुरक्षा सहयोग

Published on: July 8, 2026
India-Indonesia strategic

जागृत भारत,नई दिल्ली/जकार्ता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, व्यापार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सिस्टम और समुद्री सहयोग समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई। इन समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास की योजना मानी जा रही है।

सुमात्रा द्वीप के उत्तरी छोर पर स्थित सबांग बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास है और भारत के प्रस्तावित ग्रेट निकोबार इंटरनेशनल ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विशेषज्ञ इसे हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र मानते हैं।

ब्लू इकोनॉमी और समुद्री व्यापार पर जोर

संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया, दो समुद्री पड़ोसी देशों के रूप में, ब्लू इकोनॉमी, पोर्ट डेवलपमेंट और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करेंगे। सबांग एक प्राकृतिक गहरे पानी का बंदरगाह है, जहां बड़े व्यावसायिक जहाजों के साथ-साथ नौसैनिक पोत और पनडुब्बियां भी आ-जा सकती हैं।

क्या है सबांग परियोजना का उद्देश्य?

भारत और इंडोनेशिया ने इस परियोजना को मुख्य रूप से व्यापार, पर्यटन और संपर्क (कनेक्टिविटी) बढ़ाने की पहल बताया है। दोनों देशों की योजना अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और इंडोनेशिया के सुमात्रा क्षेत्र के बीच समुद्री संपर्क को मजबूत करने की है। प्रस्तावित योजना के तहत सबांग, पोर्ट ब्लेयर और हैवलॉक के बीच समुद्री पर्यटन, क्रूज सेवा, डाइविंग और वेलनेस टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।

ग्रेट निकोबार और सबांग की रणनीतिक अहमियत

ग्रेट निकोबार और सबांग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित हैं। इस क्षेत्र से वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

सबांग बंदरगाह और ग्रेट निकोबार ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट के विकसित होने से:

  • भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों का रणनीतिक सहयोग और गहरा होगा।

चीन के लिए क्यों अहम है मलक्का जलडमरूमध्य?

मलक्का जलडमरूमध्य चीन के लिए प्रमुख ऊर्जा और व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। विभिन्न आकलनों के अनुसार:

  • चीन के कच्चे तेल के आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
  • चीन के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण भाग भी इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है।
  • किसी भी प्रकार का व्यवधान चीन की आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

क्या है ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट?

भारत का ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के सबसे दक्षिणी हिस्से में विकसित किया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत 72,000 करोड़ से 92,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है।

इस परियोजना के प्रमुख घटक हैं:

  • इंटरनेशनल ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट (गैलाथिया खाड़ी)
  • नागरिक एवं सैन्य उपयोग वाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
  • ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी
  • ऊर्जा आपूर्ति के लिए पावर प्लांट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाएं योजनानुसार आगे बढ़ती हैं, तो इससे भारत और इंडोनेशिया के बीच आर्थिक, समुद्री और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, इन परियोजनाओं के दीर्घकालिक प्रभाव उनके क्रियान्वयन और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेंगे।


इसे भी पढ़ें : भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग को लेकर खरगे का मोदी सरकार पर हमला, फीस बढ़ोतरी और वीजा सेवाओं पर भी उठाए सवाल


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