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‘वंदे मातरम’ विवाद पर INDIA गठबंधन का BJP पर पलटवार, कीर्ति आजाद बोले- क्या इससे कम राष्ट्रवादी हो जाता हूं?

Published on: August 17, 2026
INDIA on the 'Vande Mataram' controversy

जागृत भारत,नई दिल्ली : बीजेपी की ओर से एआईसीसी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर लगाए गए आरोपों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। INDIA गठबंधन के नेताओं ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने बीजेपी पर राष्ट्रवाद के मुद्दे को राजनीतिक बहस का हथियार बनाने और जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद ने बीजेपी पर साधा निशाना

पटना में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस दौर में ‘वंदे मातरम’ लिखा गया था, उस समय भाजपा का अस्तित्व ही नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस का ही स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख योगदान था। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है।

कीर्ति आजाद ने बीजेपी से पूछा सवाल

दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने भी बीजेपी पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी इस मुद्दे के जरिए लोगों को उकसाना चाहती है। कीर्ति आजाद ने बीजेपी के कार्यक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि जब वहां ‘वंदे मातरम’ के बजाय फिल्म ‘वंदे मातरम’ का गीत बजाया गया था, तब बीजेपी नेताओं ने इस पर सवाल क्यों नहीं उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर गीत के स्वरूप को लेकर इतना जोर दिया जा रहा है तो उन कार्यक्रमों में हुए इस्तेमाल पर भी उसी तरह की आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।

‘छहों पद गाकर दिखाएं’

कीर्ति आजाद ने बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे सामने आकर ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पद गाकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि वह खुद सभी छह पद नहीं गा सकते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी देशभक्ति कम हो जाती है। उनका यह बयान बीजेपी और विपक्ष के बीच चल रहे राष्ट्रवाद से जुड़े राजनीतिक विवाद को और तीखा करने वाला माना जा रहा है।

संजय राउत ने भी उठाए सवाल

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी बीजेपी के आरोपों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के छह पद हैं और सभी छह पदों का गायन अनिवार्य किया जाना जरूरी नहीं है। राउत ने संसद में इससे जुड़े कानून पर चर्चा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब संसद में कानून पारित किया जा रहा था, तब केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री मौजूद नहीं थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे भी अपमान माना जाना चाहिए।

आजादी की लड़ाई में ‘वंदे मातरम’ का जिक्र

संजय राउत ने स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने लोगों में जोश और जागरूकता पैदा करने के लिए ‘वंदे मातरम’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति की भावना केवल किसी गीत के सभी पद गाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके पीछे आजादी और देश के लिए संघर्ष की भावना महत्वपूर्ण थी।

विवाद के बीच सियासत तेज

‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। बीजेपी जहां इसे राष्ट्रसम्मान और राष्ट्रीय भावना से जोड़ रही है, वहीं INDIA गठबंधन के नेता इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी जारी है और ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।



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