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फर्जी आईपीएस शनि शर्मा का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: शैक्षणिक दस्तावेज, जन्मतिथि और स्कूल रिकॉर्ड तक में भारी हेरफेर

Published on: January 25, 2026
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जागृत भारत | गोरखपुर(Gorakhpur): जिले में खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर वर्षों तक रौब झाड़ने और कथित वसूली करने वाले शनि शर्मा उर्फ सनी शर्मा की पोल खुल गई है। जन सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी में उसके शैक्षणिक दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी पाया गया है। जन्मतिथि, विद्यालय के रिकॉर्ड और प्रमाणपत्रों में गंभीर स्तर की हेरफेर सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।


जन्मतिथि और स्कूल रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी

जांच में सामने आया कि सनी शर्मा ने बाबू हरिचरन हाई स्कूल, तिघरा, पीपीगंज से कक्षा 8 का अंकपत्र और स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) प्रस्तुत किया था, जिसमें उसकी जन्मतिथि 16 मई 1992 दर्ज है। हालांकि जब इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक से मूल अभिलेखों की पुष्टि कराई गई, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। स्कूल के रजिस्टर में पंजीकरण संख्या 1500 पर सनी शर्मा का नाम ही दर्ज नहीं था। इससे स्पष्ट हुआ कि जिस विद्यालय के नाम पर उसने दस्तावेज लगाए, वहां उसका कोई शैक्षणिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।


दो स्कूलों में अलग-अलग जन्मतिथि का खुलासा

जांच यहीं नहीं रुकी। नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीपीगंज के रिकॉर्ड में सनी शर्मा का प्रवेश कक्षा एक में सत्र 2009-10 में दर्ज पाया गया। यहां उसकी जन्मतिथि 2 अगस्त 1995 अंकित है। दो अलग-अलग विद्यालयों में अलग जन्मतिथि और शैक्षणिक विवरण मिलने से यह साफ हो गया कि उसने योजनाबद्ध तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर किया था।


मृतक आश्रित कोटे में भी फर्जीवाड़े का आरोप

सबसे गंभीर आरोप यह है कि सनी शर्मा ने अपने पिता के स्थान पर मृतक आश्रित कोटे से गोरखपुर विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति पाने के लिए फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने जानबूझकर नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त वास्तविक शिक्षा को छिपाया और बाबू हरिचरन स्कूल के कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर नौकरी हासिल की।


शिकायत से शुरू हुई जांच, आरटीआई से हुआ खुलासा

यह पूरा मामला दुर्मेशनंदिनी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश शर्मा, निवासी अंबेडकरनगर, पीपीगंज की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत के आधार पर बिंदुवार जांच कराई गई, जिसमें शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की परत-दर-परत सच्चाई उजागर होती चली गई।


पुलिस और विश्वविद्यालय को सौंपे गए दस्तावेज

मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार और विश्वविद्यालय के कुलसचिव को सौंप दिए गए हैं। इसके बाद पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सनी शर्मा की नौकरी पर बर्खास्तगी की तलवार लटक सकती है और उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।


विस्तृत जांच की सिफारिश, कार्रवाई के संकेत

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय स्तर पर विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है। प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई की तैयारी चल रही है।


पुलिस का बयान

एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में लिया गया है और दस्तावेजों की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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