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मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश: 31.37 एकड़ सरकारी जमीन खाली करे SASTRA यूनिवर्सिटी, चार हफ्ते में बेदखली के निर्देश

Published on: January 10, 2026
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जागृत भारत | तमिलनाडू(Tamilnadu): मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम और सख्त फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह तंजावुर स्थित शन्मुगा आर्ट्स, साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च अकादमी (SASTRA) को उसके कब्जे में रही 31.37 एकड़ सरकारी जमीन से बेदखल करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।

पुलिस की मदद लेने की भी अनुमति

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमणियम और न्यायमूर्ति सी. कुमारप्पन की तृतीय खंडपीठ ने दिया। पीठ ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो तंजावुर के जिलाधिकारी पुलिस की सहायता भी ले सकते हैं, ताकि बेदखली की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

जेल निर्माण के लिए चाहिए जमीन

अदालत ने सरकार की उस दलील को स्वीकार किया, जिसमें कहा गया था कि इस 31.37 एकड़ भूमि पर एक नई जेल की स्थापना की जानी है। अदालत ने माना कि यह एक सार्वजनिक उद्देश्य की परियोजना है, जिसे लंबे समय से केवल मुकदमेबाजी के कारण लागू नहीं किया जा सका।

यूनिवर्सिटी की याचिकाएं खारिज

कोर्ट ने SASTRA यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2022 में दायर दो रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में विश्वविद्यालय ने 23 फरवरी 2022 को जारी सरकारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सरकार ने यूनिवर्सिटी को सरकारी जमीन सौंपने से इनकार कर दिया था।
यूनिवर्सिटी ने इसके बदले अन्य जमीन देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया था।

“अवैध कब्जे पर कोई अधिकार नहीं”

खंडपीठ ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा—
“सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले व्यक्ति या संस्था को उसे अपने नाम पर आवंटित कराए जाने का कोई पूर्ण अधिकार नहीं है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि वैकल्पिक भूमि स्वीकार करना या न करना सरकार का पूर्ण विवेकाधिकार है।

30 साल तक चली मुकदमेबाजी पर टिप्पणी

फैसले को लिखते हुए न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमणियम ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि
SASTRA यूनिवर्सिटी ने एक शैक्षणिक संस्था होने के कारण बार-बार एक ही मुद्दे पर मुकदमे दायर कर पिछले करीब 30 वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया को लंबा खींचा
कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा याचिकाएं भी तीन वर्षों से हाईकोर्ट में लंबित थीं, जिससे सरकार की परियोजना अटकी रही।

अन्य संस्थानों से तुलना नहीं कर सकती यूनिवर्सिटी

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि सरकार ने अतीत में कुछ अन्य संस्थानों को जमीन आवंटित की थी, SASTRA यूनिवर्सिटी समानता (Parity) का दावा नहीं कर सकती

यूनिवर्सिटी ने क्या प्रस्ताव दिया था

यूनिवर्सिटी ने अदालत को बताया था कि उसके पास—

  • थिरुमलैसमुद्रम कैंपस के सामने 32 एकड़ निजी भूमि,

  • कैंपस से सटी 36.16 एकड़ भूमि,

  • और पड़ोसी थचंकुरिची गांव में 86.80 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध है,
    जहां बिजली, बोरवेल और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं।

यूनिवर्सिटी ने इन जमीनों में से किसी एक को सरकारी भूमि के बदले देने और मूल्य अंतर चुकाने की पेशकश की थी, लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

अब चार हफ्ते में खाली करनी होगी जमीन

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब SASTRA यूनिवर्सिटी को चार सप्ताह के भीतर 31.37 एकड़ सरकारी भूमि खाली करनी होगी, अन्यथा प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है।

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