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प्रयागराज: बिना ठोस साक्ष्य सिर्फ शिकायत पर अस्पताल सील करने पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार पर 20 हजार का जुर्माना

Published on: December 13, 2025
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जागृत भारत | प्रयागराज(Prayagraj): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महराजगंज जिले के सोनौली क्षेत्र में एक निजी अस्पताल को बिना पर्याप्त साक्ष्य केवल शिकायत के आधार पर सील किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस कार्रवाई को जल्दबाजी और कानून के विपरीत बताते हुए राज्य सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और तत्काल प्रभाव से अस्पताल की सील हटाने का आदेश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने डॉ. नरेश कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनाया।

शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई, साक्ष्य का अभाव

मामले में याची डॉ. नरेश कुमार गुप्ता एक निर्माणाधीन निजी अस्पताल के संचालक हैं। जुलाई 2025 में अस्पताल के एक कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अस्पताल परिसर में सरकारी दवाएं और एक्सपायर्ड लैब किट रखी गई हैं। इस शिकायत के आधार पर सोनौली थाने ने जिला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजी, जिसके बाद पांच जुलाई 2025 को एक संयुक्त टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया और उसी रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल को सील कर दिया गया।

हाईकोर्ट में कार्रवाई को दी गई चुनौती

अस्पताल सील किए जाने की कार्रवाई को याची ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची की ओर से दलील दी गई कि अस्पताल अभी निर्माण के अंतिम चरण में था और संचालन शुरू ही नहीं हुआ था। अस्पताल के पूर्ण होने के बाद नियमानुसार पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाना था। पूर्व में पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था, जिसे प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण और अग्निशमन व्यवस्था की कमी के चलते खारिज कर दिया गया था। इन कमियों को दूर करने के बाद पुनः निरीक्षण और पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की योजना थी।

निरीक्षण में न मरीज मिले, न संचालन के प्रमाण

सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई मरीज नहीं पाया गया और न ही अस्पताल चालू स्थिति में था। कोर्ट ने जब यह पूछा कि क्या निरीक्षण दल को किसी मरीज की डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची, दवाओं की बिक्री या अस्पताल संचालन का कोई ठोस प्रमाण मिला, तो इसका उत्तर स्पष्ट रूप से नकारात्मक था।

कोर्ट ने बताया जल्दबाजी में की गई कार्रवाई

खंडपीठ ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारियों ने बिना ठोस आधार के बेहद जल्दबाजी में कार्रवाई की। यह जांच ही नहीं की गई कि अस्पताल वास्तव में बिना पंजीकरण के संचालित हो रहा था या नहीं। केवल शिकायत के आधार पर अस्पताल सील करना कानूनसम्मत नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई ठोस साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि केवल आरोपों पर।

सील हटाने का आदेश, जुर्माना अधिकारियों से वसूलने की छूट

हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल की सील हटाने का आदेश दिया और राज्य सरकार पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी कि वह यह जुर्माना राशि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाह और जल्दबाजी वाली कार्रवाई से बचा जा सके।

यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि किसी भी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून, प्रक्रिया और साक्ष्यों का पालन अनिवार्य है।

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