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यूपी विधानसभा में हंगामे पर भावुक हुए स्पीकर सतीश महाना, बोले- ‘सोचने पर मजबूर हूं कि इस पद के योग्य हूं या नहीं’

Published on: August 6, 2026
On the uproar in the UP Assembly

जागृत भारत,लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को हुए हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में भावुक नजर आए। बुधवार को कार्यवाही शुरू होते ही उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से उन्होंने विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने का लगातार प्रयास किया, लेकिन मंगलवार की घटनाओं ने उन्हें गहरा आहत किया है।

महाना ने कहा कि सदन में जो कुछ हुआ, उससे वह बेहद दुखी और निराश हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें आत्ममंथन करना पड़ेगा कि क्या वह इस जिम्मेदारी के योग्य हैं या नहीं।

‘आत्ममंथन के बाद लूंगा फैसला’

स्पीकर ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन करने और विधायिका की प्रतिष्ठा बनाए रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि समाज में विधायकों और विधानसभा की छवि को लेकर बनने वाली नकारात्मक धारणा उन्हें हमेशा पीड़ा देती रही है।

उन्होंने कहा, “मैं आत्ममंथन करूंगा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में जो किया, वह उचित था या अनुचित। इसके बाद ही आगे कोई निर्णय लूंगा।”

‘विपक्ष का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा’

सतीश महाना ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष केवल सरकार की प्रशंसा करने के लिए नहीं होता, बल्कि जनता के मुद्दों को उठाने और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करता है।

उन्होंने कहा कि कई बार सदन में असहज परिस्थितियां बनती हैं, लेकिन उन्हें लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर संभालना हमारी संसदीय परंपरा रही है।

बाबासाहेब आंबेडकर का किया उल्लेख

अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने चेतावनी दी थी कि भविष्य में यदि कोई समस्या आएगी तो वह संविधान में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले लोगों में होगी।

महाना ने कहा, “कल सदन में जो हुआ, उससे पहली बार लगा कि कहीं न कहीं हमारे प्रयासों में कमी रह गई या फिर बाबासाहेब की कही बात सही साबित हो रही है कि दोष संविधान में नहीं, बल्कि व्यक्तियों में होता है।”

‘एक सदस्य के व्यवहार ने सबसे अधिक दुख पहुंचाया’

स्पीकर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सदन के एक ऐसे सदस्य के व्यवहार ने उन्हें सबसे अधिक निराश किया, जिन्हें इस विधानसभा में एक आदर्श (रोल मॉडल) माना जाता है।

उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन अब अंतिम चरण में है और अध्यक्ष बनने के बाद उनकी हमेशा यही कोशिश रही कि विधानसभा ने उन्हें जो सम्मान और जिम्मेदारी दी है, उसका पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर सकें। हालांकि मंगलवार की घटनाओं ने उन्हें अपने कार्यकाल और भूमिका पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।



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