टेलीविजन क्विज़ शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के हालिया एपिसोड में एक 10 वर्षीय प्रतिभागी, इशित भट्ट को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इशित, जो कक्षा 5 के छात्र हैं, शो के दौरान अपने आत्मविश्वास और बातों को रखने के तरीके को लेकर चर्चा में आए। हालांकि, सोशल मीडिया के एक वर्ग ने उनके हाव-भाव और बातचीत के लहजे को ‘अति-आत्मविश्वास (Overconfident)’ और ‘अशिष्ट’ बताया।
यह आलोचना जल्द ही एक बड़े सोशल मीडिया डिबेट में बदल गई, जहां कई यूज़र्स ने बच्चे को सीधे तौर पर ट्रोल करना शुरू कर दिया। सबसे ज़्यादा आपत्तिजनक बात यह है कि इस बहस ने इशित की परवरिश (Parenting) पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिसे विशेषज्ञों ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन करार दिया है।
विशेषज्ञों की अपील: सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना बंद करें!
बाल मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Child Psychology and Mental Health Experts) ने इस पूरे विवाद पर कड़ी आपत्ति जताई है और सोशल मीडिया यूज़र्स से इस बहस को तुरंत बंद करने की अपील की है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा है:
- बच्चे को शर्मिंदा करना गलत: यह किसी भी मायने में सही नहीं है कि 10 साल के बच्चे को उसके सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए ऑनलाइन ट्रोल किया जाए या उसे सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा (Publicly Shame) किया जाए।
- भावनात्मक विकास पर असर: विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नकारात्मक और कठोर टिप्पणियां बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास (Emotional Development) पर गंभीर असर डाल सकती हैं। इतनी कम उम्र में सार्वजनिक आलोचना झेलना किसी भी बच्चे के लिए आघात जैसा हो सकता है।
- आत्मविश्वास और अति-आत्मविश्वास में अंतर: बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) ने समझाया कि जो चीज़ वयस्कों को ‘अति-आत्मविश्वास’ लग रही है, वह वास्तव में उस बच्चे का सहज आत्मविश्वास हो सकता है। शो का माहौल, अमिताभ बच्चन जैसे हस्ती के सामने बैठना और एक बड़े मंच पर होने का रोमांच बच्चे में अलग तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकता है। इसे ‘परवरिश में कमी’ (Parenting Fail) बताना सही नहीं है।
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परवरिश पर सवाल क्यों गलत?
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने इशित के माता-पिता की आलोचना की और उनकी परवरिश के तरीके पर सवाल उठाए। विशेषज्ञों ने इस दृष्टिकोण को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
- अधूरे संदर्भ पर राय: एक बच्चे के कुछ मिनटों के टीवी फुटेज के आधार पर उसकी पूरी परवरिश पर फैसला सुनाना पूरी तरह से असंबद्ध और अन्यायपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति एक छोटी सी क्लिप देखकर यह तय नहीं कर सकता कि माता-पिता ने अपने बच्चे को कैसे पाला है।
- माता-पिता का सम्मान: इशित के शो तक पहुंचने और उस स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए उनके माता-पिता ने निश्चय ही कड़ी मेहनत और समर्थन दिया होगा। इस उपलब्धि को नज़रअंदाज़ कर सिर्फ कुछ शब्दों या हाव-भाव के लिए उनकी निंदा करना अनुचित है।
- ट्रोलिंग से बचें: विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर एक स्वस्थ और जिम्मेदार व्यवहार (Responsible Behavior) अपनाना ज़रूरी है। किसी भी बहस को बच्चे पर व्यक्तिगत हमले या उसके माता-पिता की आलोचना तक नहीं ले जाना चाहिए।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया है कि इशित भट्ट के खिलाफ चल रहे इस ट्रोल अभियान को तुरंत बंद कर देना चाहिए।
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