Breaking News

मक्का डिफेंस पैक्ट में मिस्र की एंट्री के संकेत, एर्दोगन के दावे से बढ़ी हलचल; भारत के लिए क्यों अहम?

Published on: August 16, 2026
Egypt's role in the Mecca Defense Pact

जागृत भारत,अंकारा : तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि मिस्र भी इस समझौते में शामिल हो सकता है। एर्दोगन ने कहा कि यह समझौता केवल मौजूदा सदस्य देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे देशों के लिए भी इसके दरवाजे खुले हैं।

फिलहाल समझौते में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हैं। इसमें सामूहिक रक्षा से जुड़ी ऐसी व्यवस्था बताई जा रही है, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर बाहरी हमला होने की स्थिति में अन्य सदस्य उसके समर्थन में कार्रवाई करेंगे। इसी वजह से इसे कई जगहों पर ‘इस्लामिक NATO’ की संज्ञा दी जा रही है।

एर्दोगन ने मिस्र के शामिल होने की जताई संभावना

अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में एर्दोगन ने कहा कि समझौते में शामिल देश इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि यदि किसी एक सदस्य पर बाहरी हमला होता है तो सभी मिलकर उसका सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। इसी दौरान उन्होंने मिस्र के संभावित रूप से इसमें शामिल होने की बात कही। एर्दोगन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में अन्य देश भी इस समझौते का हिस्सा बन सकते हैं। अगर मिस्र इस समझौते में शामिल होता है तो इसका दायरा और रणनीतिक महत्व दोनों बढ़ सकते हैं। मिस्र अरब दुनिया का एक प्रमुख देश है और उसकी भौगोलिक स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए क्यों अहम है मिस्र?

मिस्र लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी रह चुके हैं। मिस्र की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ताकतों में से एक स्वेज नहर है। यह एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों में शामिल है। भारत के यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र के साथ व्यापार के लिए भी इसका बड़ा महत्व है।

ऐसे में यदि मिस्र पाकिस्तान और तुर्की के साथ किसी व्यापक सामूहिक रक्षा व्यवस्था में शामिल होता है तो भारत को इस नए रणनीतिक समीकरण पर नजर रखनी होगी। हालांकि, केवल किसी रक्षा समझौते में मिस्र के शामिल होने से भारत के व्यापार या सुरक्षा मार्गों पर तत्काल खतरा पैदा हो जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

होर्मुज को लेकर भी एर्दोगन का बयान

इंटरव्यू के दौरान एर्दोगन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोलने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसका लंबे समय तक बंद रहना किसी के हित में नहीं है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक तनाव रहने से तेल और गैस की आपूर्ति के साथ-साथ वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। एर्दोगन ने क्षेत्रीय संघर्षों में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए कतर की भी प्रशंसा की।

सीरिया और कुर्द मुद्दे पर भी बोले एर्दोगन

तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश लेबनान, सीरिया और गाजा को अकेला नहीं छोड़ेगा। उन्होंने सीरिया में स्थिरता कायम करने के लिए तुर्की की भूमिका जारी रखने की बात कही। एर्दोगन ने सीरिया की संभावित यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुर्द समुदाय को भी क्षेत्र में शांति और स्थिरता की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

तुर्की लंबे समय से कुर्द संगठनों को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है। हालांकि, सीरिया में बदलते राजनीतिक और सैन्य समीकरणों के बीच तुर्की और कुर्द समूहों के संबंधों में भी नए बदलाव देखने को मिले हैं।

बढ़ सकता है क्षेत्रीय रणनीतिक प्रभाव

अगर भविष्य में मिस्र वास्तव में मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में शामिल होता है, तो पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र का यह संभावित समूह मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और उत्तरी अफ्रीका के रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि उसके पारंपरिक साझेदार मिस्र के साथ संबंध इस नए सैन्य समीकरण के बावजूद किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। फिलहाल एर्दोगन का बयान एक संभावना के तौर पर सामने आया है और मिस्र की ओर से समझौते में शामिल होने की कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।


इसे भी पढ़ें : सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी, पूर्व सैन्य अधिकारी ने माना- भारत के सामने कानूनी विकल्प सीमित


Discover more from jagrutbharat.com :: जागृत भारत

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!