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UP Police की मनमानी पर High Court नाराज, चोरी के आरोपित की बहन की अवैध हिरासत पर लखनऊ पीठ का सख्त रुख

Published on: January 14, 2026
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जागृत भारत | उन्नाव(Unnao): जिले की पुलिस पर चोरी के एक मामले में आरोपी की बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव से तीन सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने या अगली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बाबिता रानी की खंडपीठ ने पारित किया।

क्या है पूरा मामला

सदर क्षेत्र के दरियाईखेड़ा निवासी शिव जायसवाल ने अपने घर से नकदी और जेवर चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि घर में टाइल्स लगाने आए ठेकेदार संदीप और उसके सहयोगी सचिन ने 14 से 28 जुलाई 2025 के बीच काम किया और इसी दौरान चोरी की वारदात हुई। तीन अगस्त 2025 को अलमारी से 10 हजार रुपये और लाखों के जेवर गायब मिले।

परिवार पर अवैध हिरासत और उगाही का आरोप

चोरी के आरोपी संदीप की बहन रूबी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि 5 से 8 अगस्त 2025 के बीच कोतवाली पुलिस ने पूछताछ के नाम पर उसे, उसकी मां और पिता को थाने में बैठाए रखा। सात अगस्त की रात रूबी को अवैध रूप से लॉकअप में रखा गया और मानसिक प्रताड़ना दी गई। आरोप है कि पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त किए और 10 हजार रुपये लेकर परिवार के दो लोगों को छोड़ा।

सीसीटीवी फुटेज गायब होने पर कोर्ट की नाराजगी

याचिकाकर्ता ने 5 से 8 अगस्त की कोतवाली की CCTV फुटेज निकलवाने की मांग की। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है, क्योंकि डीजीपी के 20 जून 2025 के सर्कुलर के अनुसार फुटेज केवल दो से ढाई महीने तक सुरक्षित रहती है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के 2 दिसंबर 2020 के आदेश के खिलाफ है, जिसमें कम से कम छह महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया अवमानना माना।

पुलिस कार्रवाई को बताया हल्का और लापरवाह

एसपी उन्नाव की ओर से दायर हलफनामे में स्वीकार किया गया कि पुलिस कर्मियों और याचिकाकर्ता के बीच धन से जुड़ी बातचीत हुई थी, हालांकि धन लेने की पुष्टि नहीं हो सकी। पुलिस आचरण के विपरीत व्यवहार के चलते दो सिपाहियों को लाइन हाजिर कर प्रारंभिक जांच बैठाई गई, लेकिन कोर्ट ने इसे हल्की और लापरवाह कार्रवाई करार दिया।

महिला को थाने बुलाना भी कानून का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी महिला को उसके निवास स्थान के अलावा थाने बुलाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद याचिकाकर्ता महिला को थाने बुलाया गया, जो कानून का उल्लंघन है।

एसपी का बयान

एसपी जयप्रकाश सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। पहले मिले बजट के अनुसार कैमरे लगाए गए थे, अब नया बजट मिलने के बाद ऐसे डीवीआर सिस्टम लगाए जाएंगे, जिनमें छह महीने या उससे अधिक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रह सके।

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