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उत्तर भारत में मिला खतरनाक परजीवी का नया जीनोटाइप, इंसानों में गंभीर बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा

Published on: June 18, 2026
Dangerous parasite found in North India

जागृत भारत,हिसार/नई दिल्ली : उत्तर भारत में भेड़ों और बकरियों पर किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन में एक चिंताजनक खुलासा हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस नामक परजीवी के कई खतरनाक जीनोटाइप क्षेत्र में सक्रिय रूप से फैल रहे हैं। यह परजीवी जानवरों से इंसानों तक पहुंच सकता है और सिस्टिक इचिनोकोकोसिस (हाइडेटिड रोग) जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

तीन राज्यों में 1,000 से अधिक पशुओं की जांच

यह अध्ययन हरियाणा के हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों—पल्लवी मुदगिल, अंशू लोहान, अनिल के. नेहरा, अनिल शर्मा और अमन डी. मुदगिल—द्वारा किया गया।

शोध के दौरान हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के विभिन्न बूचड़खानों में कुल 1,049 भेड़ों और बकरियों की जांच की गई। संक्रमित नमूनों के डीएनए विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने जी1, जी3 और जी6 जीनोटाइप की पहचान की।

पहली बार मिला जी6 जीनोटाइप

अध्ययन की सबसे महत्वपूर्ण खोज यह रही कि जी6 जीनोटाइप पहली बार उत्तर भारत की भेड़ों और बकरियों में स्पष्ट रूप से पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज संकेत देती है कि छोटे जुगाली करने वाले पशु इस परजीवी के प्रसार में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह जानकारी भविष्य में संक्रमण की निगरानी और नियंत्रण रणनीतियां तैयार करने में मददगार साबित हो सकती है।

इंसानों तक भी पहुंच सकता है संक्रमण

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह संक्रमण केवल पशुओं तक सीमित नहीं है। कुत्तों और अन्य कैनिड प्रजातियों के माध्यम से यह परजीवी मनुष्यों तक भी पहुंच सकता है।

पहले किए गए अध्ययनों में उत्तर भारत के लोगों में भी जी1, जी3, जी5 और जी6 जीनोटाइप की मौजूदगी दर्ज की जा चुकी है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

कैसे फैलता है हाइडेटिड रोग?

अध्ययन के अनुसार, इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस के अंडे दूषित भोजन, पानी या संक्रमित कुत्तों के संपर्क के जरिए इंसानों के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। शरीर में पहुंचने के बाद इनके लार्वा विभिन्न अंगों में जाकर पानी से भरी गांठें (सिस्ट) बना लेते हैं।

इन सिस्टों के कारण सबसे अधिक प्रभावित होने वाला अंग लीवर है, जो लगभग 70 प्रतिशत मामलों में संक्रमित पाया जाता है। इसके अलावा फेफड़े, मस्तिष्क, हड्डियां और गुर्दे भी प्रभावित हो सकते हैं।

सिस्ट फटने पर जानलेवा हो सकती है स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि शरीर में बनी सिस्ट फट जाए तो गंभीर एलर्जी, संक्रमण और जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए इस बीमारी की समय रहते पहचान और उपचार बेहद जरूरी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध परजीवी के पशुओं और मनुष्यों के बीच फैलाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इससे भविष्य में प्रभावी निगरानी, रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम विकसित किए जा सकेंगे, जिससे पशु और मानव स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


इसे भी पढ़ें : सिंधु जल संधि पर भारत के कदम से पाकिस्तान बेचैन, पूर्व भारतीय आयुक्त ने खोली पाक दावों की पोल


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