जागृत भारत,वॉशिंगटन : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों में फिर से भरोसा कायम किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की कुछ नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि उनसे दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा।
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में बोल्टन ने भारत-अमेरिका संबंध, रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान, चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
भारत पर टैरिफ को बताया नुकसानदायक
बोल्टन ने कहा कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर अपेक्षाकृत अधिक शुल्क (टैरिफ) लगाने का फैसला दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए उचित नहीं था। उनके अनुसार, ऐसी नीतियां भारत को रूस और चीन के साथ और अधिक निकट ला सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मतभेद स्थायी नहीं हैं और भविष्य में भारत-अमेरिका संबंध फिर मजबूत हो सकते हैं।
भारत-पाकिस्तान पर ट्रंप की टिप्पणी की आलोचना
जॉन बोल्टन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का श्रेय लेने की कोशिश ट्रंप की बड़ी राजनीतिक भूल थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान अमेरिका ने दोनों देशों से बातचीत जरूर की थी, लेकिन उस समय अमेरिकी प्रशासन ने कभी सार्वजनिक रूप से इसका श्रेय लेने का प्रयास नहीं किया।
पाकिस्तान की राजनीति पर टिप्पणी
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर बोल्टन ने कहा कि वहां सेना का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है। उनके अनुसार, अमेरिका की नीति हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों के साथ काम करने की रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक प्रभाव नया नहीं है, हालांकि अब यह पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।
‘इंडो-पैसिफिक’ नाम बदलने पर उठाए सवाल
अमेरिकी सैन्य कमान के नाम से “इंडो” शब्द हटाने के फैसले पर बोल्टन ने असहमति जताई। उन्होंने इसे एक “बचकानी गलती” बताते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग रणनीतिक दृष्टिकोण से देखना अमेरिका की लंबे समय से सफल नीति रही है। उनका मानना है कि भविष्य में नया प्रशासन आने पर इस फैसले की समीक्षा हो सकती है।
भारत-अमेरिका साझेदारी पर जताया भरोसा
बोल्टन ने कहा कि अमेरिका ने पिछले दो दशकों में भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग आधार पर संबंध विकसित करने की नीति अपनाई थी, जिससे भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। उनके अनुसार, दोनों देशों के साझा हित इतने व्यापक हैं कि मौजूदा मतभेदों के बावजूद भविष्य में संबंधों के और मजबूत होने की संभावना बनी हुई है।
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