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मौका अभी भी है: SIR में 75 जिलों से 2.89 करोड़ मतदाताओं के कटे नाम, 6 फरवरी तक दर्ज कराएं दावा–आपत्ति

Published on: January 7, 2026
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिनवा ने मंगलवार को प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी। इस सूची के अनुसार विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद उत्तर प्रदेश में कुल 12 करोड़ 55 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए हैं।

सीईओ के मुताबिक SIR प्रक्रिया में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। करीब 18.70 लाख मतदाताओं के हस्ताक्षर प्राप्त नहीं हो सके, जबकि 46.33 लाख मतदाताओं की मृत्यु की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 18.7 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं आए, जिसके चलते कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

नवदीप रिनवा ने स्पष्ट किया कि जिन पात्र मतदाताओं का नाम सूची से कट गया है, वे 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 के बीच दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं का नाम केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा।

6 फरवरी तक शिकायत का मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि ड्राफ्ट सूची पर आपत्तियां दर्ज कराने और नाम जुड़वाने का यह अंतिम अवसर है। सभी पात्र नागरिक समय रहते निर्वाचन कार्यालय या ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करें।

यूपी के 75 जिलों में कितने प्रतिशत वोट कटे

SIR के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। प्रमुख जिलों का आंकड़ा इस प्रकार है—

  • लखनऊ – 30.04%
  • गाजियाबाद – 28.83%
  • मेरठ – 24.65%
  • प्रयागराज – 24.64%
  • गौतमबुद्ध नगर – 23.98%
  • आगरा – 23.25%
  • हापुड़ – 22.30%
  • शाहजहांपुर – 21.76%
  • कन्नौज – 21.57%
  • बरेली – 20.99%
  • बहराइच – 20.44%
  • सिद्धार्थनगर – 20.33%
  • संभल – 20.29%

अन्य जिलों में भी 10 से 25 प्रतिशत तक वोट कटने की स्थिति सामने आई है, जिनमें कानपुर नगर, बलरामपुर, फर्रुखाबाद, सीतापुर, गोंडा, वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, अयोध्या, अमेठी और रायबरेली जैसे जिले शामिल हैं।

मतदाताओं से अपील

चुनाव आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जांच लें। यदि नाम कट गया हो या किसी प्रकार की त्रुटि हो, तो 6 फरवरी 2026 से पहले दावा-आपत्ति दर्ज कराना अनिवार्य है, ताकि आगामी चुनावों में मतदान के अधिकार से वंचित न रहना पड़े।

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