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सीजेआई पर हमला मामला: वकील ने अटॉर्नी जनरल से मांगी अनुमति, आरोपी अधिवक्ता पर अवमानना कार्रवाई की मांग

Published on: October 9, 2025
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6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में एक अभूतपूर्व घटना हुई जब अधिवक्ता राकेश किशोर ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की ओर जूते फेंके। उस समय कोर्ट में अधिवक्ता शिवम सिंह एक मामले की तत्काल सुनवाई के लिए मेंशन कर रहे थे।

मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन कुछ क्षण के लिए चौंक गए, लेकिन उन्होंने तुरंत कार्यवाही को सामान्य रूप से जारी रखा और अदालत की गरिमा बनाए रखी।


घटना के बाद की कार्रवाई

  • सुरक्षा कर्मियों ने राकेश किशोर को तत्काल कोर्टरूम से बाहर ले जाकर हिरासत में लिया।

  • बाहर निकलते समय उन्होंने “सनातन धर्म” से जुड़े नारे लगाए।

  • सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने प्रारंभिक जांच के बाद कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया और उन्हें रिहा कर दिया।


पृष्ठभूमि में विवाद

यह घटना उस समय हुई जब सीजेआई गवई की विष्णु प्रतिमा से संबंधित टिप्पणी सोशल मीडिया पर विवाद का विषय बनी हुई थी।
लगातार आलोचनाओं के बाद सीजेआई ने अदालत में स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों में आस्था रखते हैं और “सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्षता” के समर्थक हैं।


बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कार्रवाई

  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने आरोपी अधिवक्ता राकेश किशोर, जो बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में पंजीकृत हैं, को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है।

  • बीसीआई चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि आरोपी ने Advocates Act, 1961 और Bar Council of India Rules के तहत अधिवक्ताओं के व्यवसायिक आचरण और शिष्टाचार का उल्लंघन किया है।

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वकील के.आर. सुबाष चंद्रन की मांग

  • अधिवक्ता के.आर. सुबाष चंद्रन ने इस घटना को “सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला” बताया।

  • अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि आरोपी ने अपने कृत्य के प्रति कोई पश्चाताप नहीं दिखाया है और मीडिया एवं सोशल मीडिया पर अवमाननापूर्ण टिप्पणियां जारी रखीं।

  • उन्होंने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15 के तहत आपेक्षित अनुमति देने का अनुरोध किया ताकि आरोपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सके।


कानूनी प्रावधान

Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15 और Supreme Court (Contempt Proceedings) Rules, 1975 के तहत,

  • किसी निजी व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने से पहले अटॉर्नी जनरल की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।


अन्य संबंधित शिकायतें

इससे पहले “मिशन अंबेडकर” के संस्थापक ने भी अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर धार्मिक प्रवचनकर्ता अनिरुद्धाचार्य (अनिरुद्ध राम तिवारी) और यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी थी।
आरोप लगाया गया था कि इन दोनों ने सीजेआई पर हुए हमले को लेकर लोगों को भड़काया था।

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🔎 महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts):

1️⃣ आरोपी अधिवक्ता — राकेश किशोर (बार काउंसिल ऑफ दिल्ली)
2️⃣ घटना — 6 अक्टूबर 2025, सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई पर जूते फेंके
3️⃣ कार्रवाई — बीसीआई द्वारा अंतरिम निलंबन
4️⃣ शिकायतकर्ता — अधिवक्ता के.आर. सुबाष चंद्रन
5️⃣ कानूनी आधार — Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15
6️⃣ अनुमति प्राधिकारी — अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी
7️⃣ अन्य संबंधित नाम — अनिरुद्धाचार्य और अजीत भारती


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