जागृत भारत,मॉस्को : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर एक गंभीर आशंका जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध का समाधान नहीं निकलने की स्थिति में रूस आने वाले समय में नाटो के किसी सदस्य देश के खिलाफ तनाव बढ़ाने वाला कदम उठा सकता है। अमेरिकी खुफिया आकलन में साइबर हमले या सीमित सैन्य घुसपैठ जैसे विकल्पों का भी जिक्र किया गया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया अनुमानों में रूस की ओर से नाटो की एकता और आर्टिकल 5 के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता को परखने की संभावित कोशिश की आशंका जताई गई है। आर्टिकल 5 के तहत किसी एक नाटो सदस्य पर सशस्त्र हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है।
कब और कहां हो सकता है हमला?
अमेरिकी खुफिया आकलन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रूस की ओर से ऐसा कोई कदम कब उठाया जा सकता है। हालांकि, एक अमेरिकी सूत्र के मुताबिक, संभावित लक्ष्य के तौर पर बाल्टिक देशों या पोलैंड को लेकर चिंता जताई गई है।
अमेरिकी और नाटो अधिकारियों का मानना है कि यदि पुतिन को यूक्रेन युद्ध से अपने लिए स्वीकार्य तरीके से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता है, तो वह नाटो के साथ तनाव बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार रूस के पास अपने अगले कदम को लेकर फैसला करने के लिए पर्याप्त समय है और तत्काल हमले की कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
नाटो बोला- हर स्थिति के लिए तैयार
नाटो के वरिष्ठ सैन्य प्रवक्ता मार्टिन ओडोनेल ने खुफिया आकलन पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि नाटो संभावित खतरों और अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लगातार तैयारी करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटो रूस की गतिविधियों पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने सदस्य देशों की रक्षा करने तथा किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए तैयार है।
यूरोप में रूसी ड्रोन को लेकर भी चिंता
इस बीच, हाल के सप्ताहों में जर्मनी और कुछ अन्य यूरोपीय देशों में रूसी ड्रोन देखे जाने के दावे भी सामने आए हैं। जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंडट ने ड्रोन खतरे को गंभीर बताते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस खतरे से पहले से परिचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हवाई अड्डे के आसपास विस्फोटक से लैस ड्रोन की मौजूदगी एक नई चुनौती है और इसमें किसी विदेशी ताकत की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिका के हथियार भंडार पर भी सवाल
रूस से जुड़े इस खुफिया आकलन के बीच अमेरिका के हथियार भंडार को लेकर भी चिंताएं सामने आ रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हालिया सैन्य अभियानों के कारण अमेरिका के कुछ महत्वपूर्ण मिसाइल रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के THAAD मिसाइल इंटरसेप्टर के भंडार में बड़ी कमी आई है, जबकि पैट्रियट इंटरसेप्टर का भी एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है। इससे संभावित बहु-मोर्चीय संघर्ष की स्थिति में अमेरिका की सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, अमेरिकी खुफिया आकलन में रूस के नाटो पर हमले की कोई निश्चित तारीख या योजना की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल यह आशंका संभावित परिस्थितियों के आकलन के तौर पर सामने आई है।
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