जागृत भारत,नोएडा : यमुना और हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने 20 जून तक सभी अवैध पक्के निर्माणों को हटाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि तय समय सीमा तक कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण की इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छिड़ी हुई है। जहां एक वर्ग इसे पर्यावरण संरक्षण और बाढ़ सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं कुछ लोग प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
नोएडा प्राधिकरण के आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने अवैध फार्महाउस, रिसॉर्ट, स्विमिंग पूल और अन्य स्थायी निर्माणों को नदियों के प्राकृतिक प्रवाह के लिए खतरा बताते हुए कार्रवाई का समर्थन किया है।
समर्थकों का कहना है कि डूब क्षेत्र में पक्के निर्माणों के कारण बाढ़ के दौरान जल निकासी प्रभावित होती है और आसपास के इलाकों में जोखिम बढ़ जाता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह कार्रवाई पहले ही हो जानी चाहिए थी।
दूसरी ओर, आलोचकों ने सवाल उठाया है कि वर्षों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कैसे होते रहे और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
20 जून तक हटेंगे सभी अवैध निर्माण
सीईओ कृष्णा करुणेश ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यमुना और हिंडन नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद सभी अनधिकृत पक्के ढांचों की पहचान कर उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर ध्वस्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित (नोटिफाइड) डूब क्षेत्र है, जहां स्थायी निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद वर्षों से यहां फार्महाउस, मकान, रिसॉर्ट और अन्य व्यावसायिक संरचनाएं विकसित हो गई हैं।
लापरवाही पर होगी जवाबदेही तय
प्राधिकरण प्रमुख ने वर्क सर्किल अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि 20 जून तक अवैध निर्माण नहीं हटाए गए तो संबंधित अधिकारियों को उनके पद और क्षेत्रीय जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है।
उन्होंने निर्माणाधीन और पहले से बने सभी अवैध ढांचों की सूची तैयार कर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ के दौरान बढ़ती हैं मुश्किलें
अधिकारियों के अनुसार, डूब क्षेत्र में बढ़ती अवैध आबादी और निर्माणों के कारण हर वर्ष बाढ़ के समय राहत और बचाव कार्यों में गंभीर चुनौतियां सामने आती हैं। कई बार प्रशासन को बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाने पड़ते हैं।
इन क्षेत्रों में फैला है डूब क्षेत्र
यमुना नदी नोएडा के सेक्टर-94, 124, 125, 127, 128, 131, 133, 134, 135, 150 और 168 के आसपास से होकर गुजरती है। वहीं हिंडन नदी छिजारसी से शुरू होकर सेक्टर-63A, बेहलोलपुर, शहदरा, सुथियाना, गढ़ी चौखंडी, सेक्टर-123, 118, 115, 143, 143A, 148 और 150 के क्षेत्रों से बहते हुए मोमनाथल के निकट यमुना में मिलती है।
प्राधिकरण के अनुसार, इन दोनों नदियों के तटीय डूब क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अवैध फार्महाउस और अन्य स्थायी निर्माण विकसित हो चुके हैं, जिन्हें हटाने के लिए अब व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि डूब क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण न केवल नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को प्रभावित करते हैं, बल्कि बाढ़ के खतरे को भी बढ़ाते हैं। ऐसे में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई से पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन दोनों को मजबूती मिल सकती है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी डूब क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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