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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन के बीच वायरल हुआ अभिजीत दीपके का वीडियो, खाने को लेकर उठे सवाल

Published on: July 9, 2026
Sonam Wangchuk's memorial at Jantar Mantar

जागृत भारत,नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है। बताया जा रहा है कि उनका अनशन 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक Abhijeet Deepke ब्रेड पकौड़ा और नूडल्स खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है।

वीडियो को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं, तो उनके आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके भोजन करते हुए क्यों दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आंदोलन सामूहिक है, तो मुख्य टीम के अन्य सदस्य भी उपवास क्यों नहीं कर रहे।

वीडियो पर अभिजीत दीपके की सफाई

वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि वीडियो को संदर्भ से हटाकर साझा किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस समय का यह वीडियो है, उस समय सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक बाद में इस आंदोलन से जुड़े थे और उससे पहले का वीडियो सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया जा रहा है।

दीपके के अनुसार, इस वीडियो को जानबूझकर इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि आंदोलन के मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने इसे “ध्यान भटकाने की कोशिश” बताया।

मुख्य टीम ने क्यों नहीं रखा उपवास?

अभिजीत दीपके ने बताया कि आंदोलन की रणनीति पहले से तय थी। उनके मुताबिक, केवल सोनम वांगचुक को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठना था, जबकि बाकी मुख्य टीम को आंदोलन के संचालन की जिम्मेदारी संभालनी थी।

उन्होंने कहा कि यदि पूरी टीम अनशन पर बैठ जाती, तो प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों की व्यवस्था, मीडिया से संवाद, प्रशासनिक समन्वय और अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो जाते। इसलिए आंदोलन को सुचारु रूप से चलाने के लिए मुख्य आयोजकों का सामान्य रूप से काम करना जरूरी था।

वांगचुक ने खुद रोका था अनशन से

दीपके ने दावा किया कि उन्हें स्वयं सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल में शामिल होने से रोका था। उनका कहना है कि वांगचुक का मानना था कि किसी एक व्यक्ति का प्रतीकात्मक और नैतिक अनशन अधिक प्रभावी रहेगा, जबकि बाकी टीम आंदोलन के संचालन और समन्वय का काम संभालेगी।

उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग भूख हड़ताल पर बैठ जाते, तो प्रदर्शन स्थल पर आने वाले हजारों लोगों की व्यवस्था, पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय तथा अन्य जरूरी जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाता।

वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता

अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उन्होंने वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने अपना उपवास जारी रखने का फैसला किया। दीपके के मुताबिक, वांगचुक अपने आंदोलन के उद्देश्य को लेकर प्रतिबद्ध हैं और उनका मानना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

सोशल मीडिया पर जारी है बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। एक वर्ग का कहना है कि आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोगों को भी उपवास करना चाहिए, जबकि दूसरे पक्ष का तर्क है कि किसी भी लंबे आंदोलन में सभी लोगों का भूख हड़ताल पर बैठना व्यावहारिक नहीं होता और आयोजन की जिम्मेदारियां निभाने के लिए सक्रिय टीम का सामान्य रूप से काम करना आवश्यक होता है।

फिलहाल वायरल वीडियो और उस पर दी गई सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस जारी है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन और सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किए हुए है।


इसे भी पढ़ें : चीन ने प्रशांत महासागर में किया पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण, ऑस्ट्रेलिया-जापान समेत कई देशों ने जताई चिंता


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