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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर ध्वस्तीकरण के खिलाफ प्रदर्शन, विरासत नष्ट करने का आरोप

Published on: January 17, 2026
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जागृत भारत | वाराणसी(Varanasi): मणिकर्णिका घाट पर चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुनर्विकास के नाम पर शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को नष्ट किया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

प्रशासन के अनुसार पुनर्विकास योजना के तहत कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई मणिकर्णिका घाट की स्वीकृत पुनर्विकास योजना के अंतर्गत की जा रही है। उनका कहना है कि घाट पर सुविधाओं के विस्तार और बेहतर प्रबंधन के लिए निर्माण कार्य आवश्यक है और इसमें किसी भी प्रकार की धार्मिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।

मणिकर्णिका घाट का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्मशान घाटों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण देशभर से श्रद्धालु यहां आते हैं और यह घाट धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पाल समाज समिति के सदस्यों ने किया प्रदर्शन

इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से पाल समाज समिति के सदस्य और अन्य स्थानीय लोग शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विकास के बहाने घाट के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे वाराणसी की पहचान को नुकसान पहुंच रहा है।

‘विकास के नाम पर विरासत से खिलवाड़’ का आरोप

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समिति सदस्य महेंद्र पाल ने कहा कि विकास की आड़ में मणिकर्णिका घाट की मूल पहचान बदली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से सदियों पुरानी विरासत को नुकसान पहुंच रहा है।

प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार

जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को गलत बताया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घाट पर किसी भी मंदिर को न तो गिराया गया है और न ही किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई है।

मौके पर पहुंचे एसडीएम, बताया ‘भ्रम की स्थिति’

सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी आलोक वर्मा ने कहा कि निर्माण कार्य को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन स्थिति का आकलन कर रहा है और इस मामले में कुछ बाहरी तत्वों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

स्थानीय लोग काम के विरोध में नहीं

एसडीएम आलोक वर्मा ने कहा कि घाट के आसपास रहने वाले लोग निर्माण कार्य के विरोध में नहीं हैं और काम उनकी मौजूदगी में ही किया जा रहा है। एसीपी भी मौके पर मौजूद हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

खुदाई में मिली मूर्तियां और पुरावशेष सुरक्षित

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य चल रहा है और किसी भी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में सीढ़ियों का निर्माण किया जा रहा है। खुदाई के दौरान कुछ मूर्तियां और पुरावशेष मिले हैं, जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया है।

निर्माण के बाद पुनः स्थापित की जाएंगी धरोहरें

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सभी सुरक्षित की गई मूर्तियों और पुरावशेषों को उनके मूल स्थान और स्वरूप में दोबारा स्थापित किया जाएगा, ताकि घाट की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे।

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