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तीस्ता विवाद पर बांग्लादेश के बदले सुर, मंत्री बोले- ‘भारत से दोस्ताना रिश्ते खराब नहीं करना चाहते’

Published on: August 19, 2026
Bangladesh on the Teesta dispute

जागृत भारत,ढाका : बांग्लादेश और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे तीस्ता नदी जल बंटवारे के विवाद के बीच ढाका के रुख में नरमी के संकेत मिले हैं। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शहीदुद्दीन चौधरी अनी ने कहा है कि उनका देश तीस्ता नदी प्रबंधन के मुद्दे पर भारत के साथ अपने दोस्ताना संबंध खराब नहीं करना चाहता। ढाका में आयोजित एक सेमिनार में अनी ने भारत को मित्र देश बताते हुए कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के हितों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “एक मित्र को दूसरे मित्र के हितों की रक्षा करनी चाहिए।”

चीन के साथ तीस्ता प्रोजेक्ट पर बढ़ी चिंता

बांग्लादेश लंबे समय से तीस्ता नदी के पानी के बेहतर प्रबंधन और उत्तरी क्षेत्रों में बाढ़ तथा सूखे की समस्या से निपटने के लिए परियोजना आगे बढ़ाना चाहता है। इसके लिए बांग्लादेश ने चीन से भी सहयोग लिया है। हालांकि, अब बांग्लादेशी मंत्री के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि ढाका तीस्ता परियोजना को आगे बढ़ाते हुए भारत के साथ संबंधों में तनाव नहीं चाहता। अनी ने कहा कि सरकार ने परियोजना को लेकर विशेषज्ञों के साथ कई बैठकें और सेमिनार किए हैं। विस्तृत अध्ययन के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

उत्तरी बांग्लादेश के जिलों को बड़ी उम्मीद

बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता परियोजना से देश के उत्तरी हिस्से के 5 से 6 जिलों को बड़ा फायदा मिल सकता है। इन इलाकों में लंबे समय से नदी के कटाव और बाढ़ की समस्या बनी हुई है। सरकार का लक्ष्य बाढ़ के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ सूखे के दौरान कृषि और स्थानीय आबादी के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अनी ने कहा कि यदि परियोजना को लागू नहीं किया गया तो इन इलाकों में रहने वाले लोगों की समस्याएं आगे भी बनी रहेंगी। उन्होंने इसे बांग्लादेश के लिए बड़ी चुनौती बताया।

तीस्ता पर भारत-बांग्लादेश में दशकों से विवाद

तीस्ता नदी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है और आगे ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। नदी का पानी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों के लिए सिंचाई, कृषि और आजीविका की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर 1980 के दशक से बातचीत चल रही है। 1983 में एक अंतरिम समझौते के तहत भारत को 39 प्रतिशत और बांग्लादेश को 36 प्रतिशत पानी देने का प्रस्ताव था, जबकि 25 प्रतिशत पानी का हिस्सा अनिर्धारित रखा गया था।

ममता बनर्जी के विरोध से अटका समझौता

2011 में दोनों देशों के बीच तीस्ता जल बंटवारे को लेकर एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार हुआ था, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। अब बांग्लादेश चीन के सहयोग से तीस्ता परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बांग्लादेशी मंत्री का भारत के साथ संबंध खराब नहीं करने वाला बयान ढाका की संतुलित कूटनीति का संकेत माना जा रहा है।


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