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मदरसा अशरफिया मुबारकपुर (आजमगढ़) प्रकरण के बाद अनुदानित मदरसों पर कसा शिंकजा | अब उपस्थिति प्रमाणपत्र के बिना रुकेगा मदरसा शिक्षकों का वेतन

Published on: November 17, 2025
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुदानित मदरसों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर नई सख्ती लागू कर दी है। अब किसी भी शिक्षक का वेतन तभी जारी होगा, जब मदरसा प्रबंधन प्रति माह उनका उपस्थिति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगा। सरकार का यह फैसला हाल ही में सामने आए शमशुल हुदा मामले के बाद लिया गया है, जिसमें वर्षों तक बिना उपस्थिति सत्यापन के वेतन और पेंशन जारी होते रहे।

561 मदरसे और लाखों छात्र प्रभावित

राज्य में कुल 561 मदरसे सरकार से अनुदानित हैं। इनमें लगभग 2.31 लाख छात्र पंजीकृत हैं, जबकि

  • 9,889 शिक्षक

  • 8,367 शिक्षणेत्तर कर्मचारी सेवाएँ दे रहे हैं।

सरकार का मानना है कि नियमित उपस्थिति सत्यापन से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।

कैसे खुला शमशुल हुदा का पूरा मामला

एटीएस जांच में सामने आया कि मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था, लेकिन फिर भी उसे भारत में वेतन और पेंशन मिलते रहे।
मुख्य तथ्य:

  • 1984 में मदरसे में नियुक्ति

  • 2007 से ब्रिटेन में निवास

  • 2013 में ब्रिटिश नागरिकता

  • 10 साल तक वेतन वृद्धि

  • 2017 से पेंशन स्वीकृत

यह मामला सामने आने के बाद विभाग ने स्वीकार किया कि कार्यपुस्तिका व उपस्थिति की जाँच ठीक से नहीं की गई।

अब हर शिक्षक की उपस्थिति होगी सत्यापित

नए निर्देशों के अनुसार—

  • हर माह उपस्थिति प्रमाणपत्र अनिवार्य

  • उसके बाद ही वेतन जारी

  • जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी औचक निरीक्षण करेंगे

  • रैंडम चेक में यह भी देखा जाएगा कि शिक्षक वास्तविक रूप से पढ़ा भी रहे हैं या नहीं

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पहले भी नियम मौजूद थे, लेकिन अब इनका सख्ती से पालन करवाया जाएगा।

फर्जी उपस्थिति पर पूरी तरह रोक

सरकार का स्पष्ट संदेश है—

  • फर्जी हाजिरी बर्दाश्त नहीं

  • सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जाएगा

  • छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार होगा

  • भविष्य में शमशुल जैसे मामले सामने नहीं आने दिए जाएंगे

नई व्यवस्था से मदरसों में शिक्षकों की जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

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