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गाज़ा में ‘जनसंहार’ कर रहा है इज़रायल: यूएन आयोग की रिपोर्ट, नेतन्याहू समेत शीर्ष नेतृत्व पर आरोप

Published on: September 16, 2025
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संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक जांच आयोग ने मंगलवार (16 सितंबर 2025) को अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि इज़रायल गाज़ा में ‘जनसंहार’ (Genocide) कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इज़रायल के शीर्ष नेतृत्व, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल हैं, ने इस जनसंहार को भड़काने और बढ़ावा देने में सीधा योगदान दिया है।

आयोग ने अपनी 72 पन्नों की कानूनी रिपोर्ट में गाज़ा में बड़े पैमाने पर हत्या, मानवीय सहायता की रोक, जबरन विस्थापन, स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्वंस (जिसमें एक प्रजनन क्लिनिक भी शामिल है) जैसे उदाहरण देकर यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया। आयोग की अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की पूर्व जज नवी पिल्लै ने कहा, “गाज़ा में जनसंहार हो रहा है। इसकी जिम्मेदारी इज़रायली नेतृत्व के उच्चतम स्तर पर है, जिन्होंने लगभग दो वर्षों से फिलिस्तीनी समुदाय को नष्ट करने के इरादे से सुनियोजित अभियान चलाया है।”

इज़रायल का कड़ा विरोध

इज़रायल ने इस रिपोर्ट को तुरंत खारिज करते हुए इसे “विकृत और झूठा” करार दिया। जेनेवा स्थित इज़रायली मिशन ने आयोग पर “राजनीतिक एजेंडा” चलाने का आरोप लगाया और आयोग को तुरंत भंग करने की मांग की। इज़रायल के राजदूत ने रिपोर्ट को “अपमानजनक झूठा भाषण” बताया।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • आयोग ने 1948 में पारित यूएन जनसंहार कन्वेंशन के चार मानदंड पूरे होने की पुष्टि की। इनमें शामिल हैं:

    1. हत्या करना

    2. गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाना

    3. ऐसी परिस्थितियां थोपना जिनसे समुदाय का आंशिक या पूर्ण विनाश हो

    4. जन्म रोकने के उपाय थोपना

  • आयोग का दावा है कि रिपोर्ट तैयार करने में पीड़ितों और गवाहों के बयान, डॉक्टरों के साक्षात्कार, ओपन-सोर्स दस्तावेज़ों और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया गया।

  • आयोग ने कहा कि नेतन्याहू और अन्य अधिकारियों के बयानों में “जनसंहार की मंशा” के स्पष्ट प्रमाण हैं। उदाहरण के लिए, नवंबर 2023 में नेतन्याहू ने सैनिकों को लिखे पत्र में गाज़ा ऑपरेशन को बाइबिल में वर्णित “पूर्ण विनाश के पवित्र युद्ध” से तुलना की थी।

युद्ध और हताहतों का आंकड़ा

  • 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में 1,200 इज़रायली मारे गए और 251 लोगों का अपहरण हुआ।

  • इसके बाद शुरू हुए युद्ध में 64,000 से अधिक गाज़ावासी मारे गए, जबकि वैश्विक भुखमरी निगरानी एजेंसियों के अनुसार गाज़ा के कई हिस्से भुखमरी झेल रहे हैं।

  • इज़रायल फिलहाल हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में जनसंहार के आरोपों से लड़ रहा है। इज़रायल का कहना है कि यह युद्ध “आत्मरक्षा का अधिकार” है।

ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना

नवी पिल्लै, जिन्होंने 1994 में हुए रवांडा जनसंहार की जांच भी की थी, ने कहा, “रवांडा में हुई घटनाओं और गाज़ा की स्थिति में गहरी समानता है। पीड़ितों को अमानवीय घोषित किया जाता है, उन्हें ‘जानवर’ कहा जाता है और फिर निर्दयता से मार दिया जाता है।”

यूएन की आधिकारिक स्थिति

हालांकि यह आयोग स्वतंत्र है और संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक प्रतिनिधित्व नहीं करता, लेकिन इसकी रिपोर्ट अब तक की सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानूनी टिप्पणी मानी जा रही है। यूएन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वह आधिकारिक रूप से “जनसंहार” शब्द का इस्तेमाल करे।


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