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बांकीपुर उपचुनाव में पीके की जीत पर सियासी अटकलें तेज, क्या तेजस्वी यादव की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’ ने बदला चुनावी समीकरण?

Published on: August 6, 2026
PK's win in Bankipur by-election

जागृत भारत,पटना : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत के बाद बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव की अपेक्षाकृत शांत चुनावी रणनीति ने अप्रत्यक्ष रूप से प्रशांत किशोर को फायदा पहुंचाया।

चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर सीधे हमलों से परहेज किया, जबकि तेजस्वी यादव ने भी चुनाव प्रचार में अपेक्षाकृत देर से सक्रियता दिखाई। इसी को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा है कि कहीं भाजपा को रोकने की रणनीति के तहत विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने की कोशिश तो नहीं की गई।

‘साइलेंट सपोर्ट’ की चर्चा

वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी का मानना है कि प्रशांत किशोर की जीत बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत कर सकती है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र ने दावा किया कि चुनाव से पहले उनकी बातचीत एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और प्रशांत किशोर से हुई थी।

पुष्य मित्र के अनुसार, प्रशांत किशोर ने संदेश दिया था कि यदि विपक्ष का वोट नहीं बंटेगा तो भाजपा को हराया जा सकता है। उनका दावा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस रणनीति का समर्थन किया और तेजस्वी यादव से भी इस विषय पर बातचीत करने की बात कही थी।

‘अगर राजद पूरी ताकत से लड़ता तो नतीजे अलग होते’

पुष्य मित्र का कहना है कि यदि तेजस्वी यादव ने पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार किया होता तो विपक्षी वोटों का बड़ा हिस्सा राजद को जाता और भाजपा को फायदा मिल सकता था। उनके अनुसार, इस चुनाव में विपक्ष के 60-70 प्रतिशत वोट प्रशांत किशोर के पक्ष में जाने में तेजस्वी यादव की सीमित चुनावी सक्रियता की भूमिका रही।

उन्होंने यह भी कहा कि यही वजह रही कि पूरे चुनाव अभियान के दौरान प्रशांत किशोर ने राजद और तेजस्वी यादव पर तीखे हमले करने से परहेज किया।

कांग्रेस ने दावों से बनाई दूरी

हालांकि कांग्रेस इन अटकलों से सहमत नहीं है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि प्रशांत किशोर की जीत को ऐतिहासिक नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार यह परिस्थितिजन्य जीत है, जो स्थानीय राजनीतिक हालात का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि इस उपचुनाव ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।

अटकलें बरकरार, आधिकारिक पुष्टि नहीं

फिलहाल यह पूरी बहस राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं के दावों पर आधारित है। राजद, जन सुराज या कांग्रेस की ओर से इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि बांकीपुर उपचुनाव में किसी प्रकार की रणनीतिक समझ या अप्रत्यक्ष सहयोग हुआ था। ऐसे में इन दावों को राजनीतिक विश्लेषण और अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।


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