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ब्रिटेन में रहकर भी लेता रहा वेतन: आज़मगढ़ के मदरसा शिक्षक शमशुल पर एटीएस की बड़ी कार्रवाई, तीन डीएमओ जांच के घेरे में

Published on: November 17, 2025
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। आज़मगढ़ के मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खां के मामले में एटीएस की जांच ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि शमशुल 2007 में ब्रिटेन जाकर बस गया और 2013 में ब्रिटिश नागरिकता भी ले ली, लेकिन इसके बावजूद वह भारत में मदरसा शिक्षक के रूप में लगातार वेतन, वेतन वृद्धि और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करता रहा।

आरोपों में तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (डीएमओ) भी फंस गए हैं, जिनकी भूमिका को गंभीर अनियमितता माना गया है। विभाग ने शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजते हुए कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।


ब्रिटेन में रहकर भी मिलते रहे वेतन और लाभ

जांच रिपोर्ट के अनुसार, शमशुल हुदा खां को 12 जुलाई 1984 को मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मुबारकपुर, आजमगढ़ में सहायक अध्यापक (आलिया) के पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन 2007 के बाद उसने भारत में अपनी सेवाएं देना पूरी तरह बंद कर दीं और ब्रिटेन में स्थायी रूप से रहने लगा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि:

  • 2007 से 2017 तक उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए बिना हर वर्ष वेतन वृद्धि दी जाती रही।

  • 1 अगस्त 2017 को उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) प्रदान की गई।

  • और इसके बाद पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई, जबकि वह दस साल से ब्रिटेन में रह रहा था।

यह पूरा मामला विभागीय स्तर पर गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की ओर संकेत करता है।


तीन डीएमओ की भूमिका संदिग्ध, बड़ी कार्रवाई की तैयारी

एटीएस की जांच में जिन तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, वे हैं:

  • लालमन

  • प्रभात कुमार

  • साहित्य निकत सिंह

ये अधिकारी अलग-अलग समय में आज़मगढ़ में डीएमओ के रूप में तैनात रहे। जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने:

  • शमशुल की उपस्थिति का सत्यापन नहीं किया,

  • वेतन वृद्धि की फाइलें बिना जांच आगे बढ़ाईं,

  • VRS और पेंशन से जुड़े दस्तावेज बिना जांच भेज दिए।

वर्तमान में तीनों अधिकारी क्रमशः बरेली, अमेठी और गाजियाबाद में तैनात हैं। शासन ने इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।


विदेश में रहते हुए कई देशों में किया भ्रमण व धार्मिक कार्यक्रम

एटीएस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि शमशुल ने ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद कई देशों में यात्रा की और इस्लाम धर्म के प्रचार में सक्रिय रहा।
स्पष्ट है कि उसका भारत में नौकरी से कोई संपर्क नहीं था, लेकिन इसके बावजूद उसे नियम विरुद्ध लाभ मिलते रहे।


मदरसा प्रबंधन और प्रधानाचार्य की भी मिली भूमिका

शमशुल को बिना सेवा दिए वेतन और अन्य लाभ दिलाने में मदरसा प्रबंधन और प्रधानाचार्य की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
उन्होंने:

  • उपस्थिति दर्ज कराई,

  • भुगतान संबंधी कागज़ों पर हस्ताक्षर किए,

  • और गलत जानकारी विभाग को भेजी।

एटीएस ने इन्हें भी जिम्मेदार ठहराया है।


निदेशालय के अधिकारी भी जांच के दायरे में

इस मामले में केवल डीएमओ ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के कई अधिकारी भी जांच के घेरे में आए हैं। शासन ने उन अधिकारियों की सूची तैयार कर जांच शुरू कर दी है, जिन्होंने:

  • शमशुल की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की फाइल पर हस्ताक्षर किए,

  • उसके जीपीएफ भुगतान को स्वीकृत किया।

हालांकि, इन अधिकारियों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं क्योंकि जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट अभी लंबित है।


शासन की रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई के संकेत

अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि यह मामला गंभीर भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण है। इसी आधार पर:

  • तीनों डीएमओ पर विभागीय कार्रवाई,

  • मदरसा प्रबंधक और प्रधानाचार्य पर कड़ी कार्रवाई,

  • और निदेशालय के दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही

सुनिश्चित की जा सकती है।

मदरसा अशरफिया मुबारकपुर (आजमगढ़) प्रकरण के बाद अनुदानित मदरसों पर कसा शिंकजा | अब उपस्थिति प्रमाणपत्र के बिना रुकेगा मदरसा शिक्षकों का वेतन

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