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गोरखपुर विश्वविद्यालय में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ बने सांसद रवि किशन, पहली क्लास में छात्रों को दिया सफलता का मंत्र

Published on: July 19, 2026
At Gorakhpur University
जागृत भारत,गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत शुरू की गई ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना को नई पहचान मिली है। गोरखपुर से सांसद और अभिनेता रवि किशन शुक्ला ने शनिवार को विश्वविद्यालय में बतौर ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ कार्यभार संभाला और विद्यार्थियों के बीच अपनी पहली कक्षा ली। इस दौरान उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए अनुशासन, आत्मविश्वास, संघर्ष और निरंतर मेहनत को सफलता का मूल मंत्र बताया।
कक्षा की शुरुआत अपने चिर-परिचित भोजपुरी अंदाज में करते हुए रवि किशन ने विद्यार्थियों से कहा, “हमरे क्लास में बदमाशी ना चली… तनी कड़क हई त कड़के मिजाज में सिखाईब।” उनके इस अंदाज पर छात्र-छात्राओं ने तालियों के साथ स्वागत किया और पूरा माहौल उत्साह से भर गया।
अपने पहले व्याख्यान में रवि किशन ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, मेहनत और सीखने की ललक हो तो वह किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि उनका बचपन साधारण परिस्थितियों में बीता और एक समय वह मिट्टी के घर में रहते थे, लेकिन लगातार संघर्ष और अपनी कला के प्रति समर्पण ने उन्हें फिल्म जगत से लेकर देश की संसद तक पहुंचाया।
उन्होंने छात्रों से कहा कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते।
रवि किशन ने गोरखपुर और पूर्वांचल के युवाओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में अपार क्षमता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ जैसी पहल विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता के साथ निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने, अनुशासन का पालन करने और विश्वविद्यालय में उपलब्ध हर अवसर का पूरा लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि व्यवहारिक अनुभव और व्यक्तित्व विकास भी सफलता के लिए उतने ही जरूरी हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू की गई ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी व्यक्तियों को छात्रों से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ वास्तविक जीवन के अनुभवों का भी लाभ मिल सके। इसी क्रम में विश्वविद्यालय ने कला क्षेत्र से रवि किशन, उद्योग जगत से चंद्र प्रकाश अग्रवाल तथा सराफा उद्योग से अतुल सर्राफ को इस योजना से जोड़ा है।
पहली कक्षा के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने रवि किशन से अभिनय, राजनीति, करियर, संघर्ष और सफलता से जुड़े कई सवाल पूछे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों को करियर निर्माण, व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक सोच से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम में ललित कला एवं संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनुभूति दुबे ने रवि किशन का स्वागत करते हुए उन्हें कार्यभार ग्रहण कराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकार का विश्वविद्यालय से जुड़ना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। उनके अनुभव छात्रों को नई सोच, आत्मविश्वास और व्यावसायिक कौशल विकसित करने में मदद करेंगे।
इस अवसर पर प्रोफेसर उषा सिंह, डॉ. गौरी शंकर चौहान, डॉ. प्रदीप साहनी, डॉ. प्रदीप राजोरिया सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने रवि किशन के साथ संवाद कर अपने अनुभव साझा किए और विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना की।

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