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राजस्थान: टोंक में रहस्यमयी घड़ा मिलने से हड़कंप, सोना होने की अफवाह पर मची लूटपाट जैसी स्थिति

Published on: January 4, 2026
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जागृत भारत ।  राजस्थान के टोंक जिले में एक सुनसान चारागाह भूमि से निकले रहस्यमयी धातु के घड़े ने इलाके में सनसनी फैला दी। घड़े में सोने जैसी दिखने वाली धातु के टुकड़े मिलने की खबर फैलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ देर के लिए हालात बेकाबू हो गए। पुलिस और प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

यह मामला निवाई थाना क्षेत्र के सीदड़ा गांव का है, जहां शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे ग्रामीणों को चारागाह भूमि पर पूजा-अर्चना से जुड़ा सामान मिला। इससे गांव में किसी पुराने खजाने के गड़े होने की आशंका पैदा हो गई। सूचना मिलने पर तहसीलदार मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई गई।

करीब आधे घंटे की खुदाई के बाद जमीन से लगभग 100 से 150 किलो वजनी, काफी पुराना धातु का एक घड़ा निकला। यह घड़ा करीब दो फीट ऊंचा और डेढ़ फीट चौड़ा बताया जा रहा है, जिसके अंदर सोने जैसी दिखने वाली धातु के कई टुकड़े थे।

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जैसे ही घड़े को बाहर निकाला गया, वहां मौजूद लोग उस पर टूट पड़े। कई ग्रामीण घड़े से धातु के टुकड़े निकालकर भागने लगे। मौके पर तैनात पुलिस टीम ने किसी तरह लोगों को रोका और ग्रामीणों से वापस टुकड़े लेकर घड़े में रखवाए। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि कुछ टुकड़े इस अफरा-तफरी में गायब हो गए।

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने भीड़ को खुदाई स्थल से हटाया और घड़े को अपने कब्जे में ले लिया। फिलहाल इस घड़े को ट्रेजरी ऑफिस में सुरक्षित रखवाया गया है और इसकी जांच करवाई जा रही है।

पंचायत समिति सदस्य रामकिशोर मीना ने बताया कि पुलिस यह जांच कर रही है कि चारागाह भूमि पर खुदाई किसके आदेश से करवाई गई और क्या यह वास्तव में गड़ा हुआ खजाना है या कोई अन्य धातु। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

क्या कहता है कानून?

धरती में गड़े खजाने से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए भारत में भारतीय खजाना-निधि अधिनियम लागू है। इस कानून के अनुसार मिट्टी में छिपी या उससे जुड़ी कोई भी वस्तु, जिसकी कीमत 10 रुपये या उससे अधिक हो, खजाने की श्रेणी में आती है।

ऐसी कोई वस्तु मिलने पर उसे पाने वाले व्यक्ति को जिले के कलेक्टर को तुरंत सूचना देना अनिवार्य है। कलेक्टर उस खजाने को सरकारी कोष में जमा कराता है या उसकी सुरक्षा की व्यवस्था करता है। इसके बाद अधिसूचना जारी कर दावेदारों को बुलाया जाता है और सभी पक्षों को सुनने के बाद खजाने के स्वामित्व का फैसला किया जाता है।

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