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सोनभद्र खनन दुर्घटना: चट्टान धंसने से बड़ा हादसा, 15 मजदूरों के दबे होने की आशंका; 7 शव बरामद, रेस्क्यू जारी

Published on: November 18, 2025
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जागृत भारत | सोनभद्र(Sonbhadra): जिले के ओबरा क्षेत्र में स्थित बिल्ली मारकुंडी की मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान में शनिवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। खदान में ड्रिलिंग के दौरान अचानक भारी चट्टान धंस गई, जिसमें कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। प्रशासन के अनुसार लगभग 15 मजदूरों के दबे होने की आशंका है। घटना के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें 48 घंटे से लगातार राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।


मलबे से अब तक 7 शव बरामद

सोमवार को रेस्क्यू टीम ने मलबे से छह और शव निकाले। सुबह पांच बजे तक चार शव मिले थे, जबकि शाम करीब आठ बजे दो और शव बरामद किए गए।
मरने वालों में पनारी गांव के करमसार टोला निवासी दो सगे भाई—इंद्रजीत यादव (32) और संतोष यादव (30) शामिल हैं। इसके अलावा जिनकी मौत की पुष्टि हुई है, उनमें

  • रविंद्र उर्फ नानक (निवासी: पिपरखाड़, कोन)

  • रामखेलावन (40) (निवासी: खड़री टोला, पनारी)

  • गुलाब उर्फ मुंशी (निवासी: टोला जकहवा, ग्राम परसोई)

  • एक अज्ञात मजदूर, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

घटना के बाद घायलों और मृतकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। शवों की हालत इतनी गंभीर थी कि पहचान करना बेहद मुश्किल था। कई परिजन चिथड़ों में अपनों को पहचानते रहे—किसी की पहचान उसके कलावे, गोदना, या कपड़ों से हुई।


शवों को पहचानने में लगी मशक्कत

हादसा इतना भयावह था कि चट्टान के भारी मलबे ने मजदूरों के शरीर तक को चीर दिया। कई शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। रेस्क्यू टीम को अलग-थलग मिले शरीर के अंगों को सावधानी से एकत्र कर पोस्टमॉर्टम कराना पड़ा। इसके बाद शव कपड़े में लपेटकर परिजनों को सौंपे गए।


मंत्री पहुंचे पोस्टमार्टम हाउस, सहायता राशि की घोषणा

जिले के प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घोषणा की कि हादसे में मारे गए मजदूरों के परिवारों को 20.55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।


सुरक्षा की जांच में खदान को मिली थी क्लीन चिट

गौर करने वाली बात यह है कि जिस खदान में यह हादसा हुआ, उसकी पिछले वर्ष छह अफसरों की संयुक्त टीम (खान सुरक्षा, यूपीपीसीबी, खनन और प्रशासन विभाग) ने जांच की थी। रिपोर्ट में :

  • सुरक्षा उपकरणों के उपयोग,

  • बेंच बनाकर सुरक्षित खनन,

जैसे बिंदुओं पर खदान संचालकों को क्लीन चिट दी गई थी। लेकिन हालिया हादसा इस सुरक्षा रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


रेस्क्यू अभियान जारी

पुलिस-प्रशासन का कहना है कि जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई मजदूर और नहीं फंसा है, तब तक राहत-बचाव का काम जारी रहेगा। भारी मशीनों और विशेषज्ञ टीमों की मदद से मलबा हटाने का कार्य निरंतर चल रहा है।

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