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E20 पेट्रोल पर बढ़ा सियासी घमासान! अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटो कंपनियों से मांगा जवाब, माइलेज और इंजन सुरक्षा पर उठाए सवाल

Published on: July 9, 2026
Political row over E20 petrol

जागृत भारत,नई दिल्ली : देश में E20 पेट्रोल को लेकर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर E20 ईंधन के इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मांगे हैं। उन्होंने कंपनियों से सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा है। केजरीवाल का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर सरकार, वाहन निर्माता कंपनियों और वाहन मालिकों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन गई है।

E20 पेट्रोल एक ऐसा मिश्रित ईंधन है जिसमें 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। केंद्र सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो, किसानों की आय बढ़े और प्रदूषण में कमी लाई जा सके। हालांकि, पुराने वाहनों में इसके इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

29 कंपनियों को भेजे गए पत्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने बताया कि देश की सभी 29 वाहन निर्माता कंपनियों को अलग-अलग पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हीरो मोटोकॉर्प को विशेष रूप से अलग पत्र लिखे गए हैं, जबकि अन्य 26 कंपनियों से भी E20 पेट्रोल पर उनका आधिकारिक रुख मांगा गया है। उन्होंने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही इन पत्रों को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

सरकार और कंपनियों के दावों पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि 4 जुलाई को आयोजित केंद्र सरकार की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया था कि पुराने वाहनों में भी E20 पेट्रोल सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार, इससे माइलेज में केवल 3 से 5 प्रतिशत तक की मामूली कमी आती है और इंजन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

AAP प्रमुख का आरोप है कि यह दावा कंपनियों के अपने आधिकारिक दस्तावेजों से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक मंच पर कुछ और कहा जाए और आधिकारिक दस्तावेजों में कुछ और लिखा हो, तो इससे उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा होना स्वाभाविक है।

ओनर्स मैनुअल का दिया हवाला

केजरीवाल ने दावा किया कि कई कंपनियों के वाहन मालिकों को दिए जाने वाले ओनर्स मैनुअल में यह उल्लेख है कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित कुछ वाहनों में 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओनर्स मैनुअल कंपनी और ग्राहक के बीच हुए अनुबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में यदि मैनुअल और सार्वजनिक बयानों में विरोधाभास दिखाई देता है, तो कंपनियों को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

माइलेज और इंजन खराब होने पर मुआवजे की मांग

केजरीवाल ने तीन प्रमुख कंपनियों को भेजे गए पत्रों में यह भी पूछा है कि यदि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से किसी वाहन की माइलेज कम होती है या इंजन को नुकसान पहुंचता है, तो क्या संबंधित कंपनी इसकी जिम्मेदारी लेने और उपभोक्ता को मुआवजा देने के लिए तैयार है। उन्होंने कंपनियों से इस संबंध में लिखित गारंटी देने की भी मांग की है।

अन्य 26 वाहन निर्माता कंपनियों से भी उन्होंने यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके वाहनों में E20 पेट्रोल का उपयोग किस सीमा तक सुरक्षित है, इससे वाहन के प्रदर्शन पर क्या प्रभाव पड़ता है और उपभोक्ताओं की चिंताओं को दूर करने के लिए उनकी क्या नीति है।

प्रधानमंत्री को भी लिखेंगे पत्र

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखेंगे। उनका कहना है कि केंद्र सरकार को E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाने के बजाय वैकल्पिक रखना चाहिए ताकि वाहन मालिक अपनी गाड़ी की तकनीकी क्षमता के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में E20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन की माइलेज कम होती है या इंजन को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी—सरकार की या वाहन निर्माता कंपनी की।

पेट्रोल पंपों पर तीन विकल्प देने की मांग

AAP प्रमुख ने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को E20, E10 और E0 तीनों प्रकार के पेट्रोल अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि यदि लोगों के पास विकल्प होगा तो वे अपने वाहन की तकनीकी जरूरत के अनुसार सही ईंधन चुन सकेंगे।

फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजरें ऑटोमोबाइल कंपनियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। कंपनियों के जवाब आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि E20 ईंधन को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाएगा।


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