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देवरिया जेल में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का अनशन, गिरफ्तारी की CCTV फुटेज छिपाने का आरोप

Published on: January 2, 2026
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जागृत भारत | देवरिया(Deoria): देवरिया जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शुक्रवार से अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर छिपा रही है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि जब तक उनकी गिरफ्तारी की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।

अमिताभ ठाकुर लखनऊ में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। शुक्रवार को उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बहस सुनने के बाद कोर्ट ने विवेचक को सभी पत्रावलियों और जांच रिपोर्ट के साथ तलब किया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई शनिवार को होगी।

ट्रेन में गिरफ्तारी, CCTV देने से इनकार का आरोप

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने बताया कि उनकी गिरफ्तारी शाहजहांपुर में ट्रेन के भीतर की गई थी। उन्होंने प्रशासन से उस दौरान लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और डीवीआर उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई रिकॉर्ड नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए साक्ष्य जानबूझकर गायब किए जा रहे हैं।

अनशन की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है। जेल प्रशासन लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है।

1999 से जुड़ा है जमीन विवाद

अमिताभ ठाकुर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कोर्ट में पेश किया गया। उनके अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने दलील दी कि देवरिया की जमीन से जुड़ा यह मामला वर्ष 1999 का है, लेकिन इतने वर्षों बाद भी जांच एजेंसियां कोई ठोस सबूत कोर्ट के सामने पेश नहीं कर पाई हैं।

वकील ने कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी व्यक्ति को जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों का हनन है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से जमानत देने की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने विवेचक को निर्देश दिया है कि वह शनिवार को सभी दस्तावेजों और रिपोर्ट के साथ पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों। इसके बाद ही जमानत याचिका पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

जानिए क्या है पूरा मामला

अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1999 में देवरिया में एसपी रहते हुए अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम औद्योगिक क्षेत्र में एक प्लॉट खरीदा था। आरोप है कि आवंटन के समय पत्नी का नाम ‘नूतन देवी’ और पति का नाम ‘अभिजात’ दर्ज कराया गया, जबकि वास्तविक नाम अमिताभ ठाकुर है। इसी आधार पर फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

सितंबर 2025 में इस मामले को लेकर लखनऊ के तालकटोरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। जांच के दौरान देवरिया सदर कोतवाली में भी एक अलग केस दर्ज किया गया।

पुलिस ने 10 दिसंबर को शाहजहांपुर से अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

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