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पीएमओ–सीएमओ का निर्देश: मणिकर्णिका घाट पर विकास के साथ धरोहरों का संरक्षण अनिवार्य

Published on: January 16, 2026
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जागृत भारत | वाराणसी(Varanasi): महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास परियोजना के तहत बीते मंगलवार को एक प्राचीन मढ़ी (चबूतरे) को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। इस दौरान मलबे में पड़ी लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति और घाट की सीढ़ियों पर लगे फूल-पत्ती सहित अन्य कलाकृतियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया।

पीएमओ और सीएमओ ने लिया संज्ञान

वीडियो प्रसारित होने और बढ़ते विरोध के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लिया। दोनों कार्यालयों की ओर से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पुनर्विकास कार्य करते समय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन का दावा: मूर्तियां सुरक्षित, पुनः होंगी स्थापित

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति सहित अन्य धरोहरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। सभी मूर्तियों को संरक्षण के दृष्टिगत संस्कृति विभाग के परिसर में सुरक्षित रखा गया है। पुनर्विकास कार्य पूरा होने के बाद इन्हें उसी स्थान पर पूरे सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा।

विपक्ष का हमला, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला।

विपक्षी नेताओं के बयान से गरमाया माहौल

मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ऐतिहासिक विरासतों को मिटाकर केवल अपनी ‘नेमप्लेट’ लगाने की सोच रखते हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि मणिकर्णिका घाट की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को नवीनीकरण के नाम पर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति का अपमान किसी भी आस्थावान के लिए अस्वीकार्य है और काशी की अविनाशी विरासत ही भाजपा के लिए विनाश का कारण बनेगी।

स्थानीय संगठनों और घाट से जुड़े लोगों का विरोध

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर पाल समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल पिंटू ने समर्थकों के साथ विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर धरोहरों को हटाना गलत है। घाट के चच्छन गुरु ने आरोप लगाया कि पुनर्विकास के नाम पर घाट का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है और आसपास रहने वालों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है।

होलकर वंश के प्रतिनिधि भी पहुंचे बनारस

विवाद के अगले दिन होलकर वंश के प्रतिनिधि यशवंत राव तृतीय वाराणसी पहुंचे और मणिकर्णिका घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर मूर्तियों और धरोहरों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

18 करोड़ की परियोजना, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य

मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को किया था। करीब 18 करोड़ रुपये की यह परियोजना रूपा फाउंडेशन, कोलकाता द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से कराई जा रही है। कार्यदायी संस्था को यह परियोजना जून 2026 तक पूरी करनी है।

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