जागृत भारत। लखनऊ में सहारा समूह के कर्मचारियों का गुस्सा अपने चरम पर पहुंच गया। बकाया वेतन और अन्य मांगों को लेकर नाराज कर्मचारियों ने सहारा सिटी परिसर को पूरी तरह से सील कर दिया। कर्मचारियों ने न केवल सातों गेटों पर ताले जड़े, बल्कि उन्हें वेल्डिंग कराकर बंद भी कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति भी काट दी, जिससे कॉलोनी अंधेरे में डूब गई।
कर्मचारियों का विरोध
कर्मचारियों का कहना है कि सहारा प्रबंधन उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहा और पूरी तरह मौन साधे हुए है। इसके विरोध में सभी कर्मचारी एकजुट होकर धरने पर बैठे और किसी को भी परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। रात में भी वे जनरेटर चलाकर विरोध जारी रखे हुए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन ने सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय के करीबी रिश्तेदारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन उनकी जायज मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया।
मुख्य मांगें
बकाया वेतन और रुकी हुई सैलरी का तुरंत भुगतान
समस्याओं का स्थायी समाधान
पुलिस और कर्मचारियों में नोकझोंक
धरने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक सहारा सिटी का कोई गेट नहीं खुलेगा। पुलिस और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन कर्मचारी अपने रुख पर अड़े रहे।
सहारा समूह की मुश्किलें बढ़ीं
यह विरोध न केवल सहारा समूह की वित्तीय संकट को उजागर करता है, बल्कि हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रबंधन की चुप्पी और कर्मचारियों की नाराजगी ने सहारा समूह की साख को और नुकसान पहुँचाया है। यह घटनाक्रम कर्मचारियों की हताशा और संगठन की डांवाडोल स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने लाता है।
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