मायावती को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प
बसपा में शामिल होने के बाद अस्मिता चंद ने कहा कि वह पार्टी की नीतियों और राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के विचारों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत और ईमानदारी से काम करेंगी। उन्होंने 2027 में मायावती को पांचवीं बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प भी लिया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम और चिल्लूपार से उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
भाजपा में 22 साल तक रहीं सक्रिय
अस्मिता चंद लंबे समय से भाजपा से जुड़ी हुई थीं। वर्ष 2022 से वह भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं। पिछले कुछ समय से चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में उनके नाम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं।
सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें चिल्लूपार से अपना उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि, अब उनके बसपा में शामिल होने के बाद इन चर्चाओं को नया मोड़ मिल गया है।
चंद परिवार की राजनीति में मजबूत पकड़
अस्मिता चंद का परिवार पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनके पति के भाई सीपी चंद समाजसेवी और कारोबारी हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और वर्ष 2016 में एमएलसी बने थे। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और 2022 में भाजपा के टिकट पर गोरखपुर-महराजगंज स्थानीय निकाय क्षेत्र से एमएलसी निर्वाचित हुए।
वहीं, अस्मिता चंद के परिवार का चिल्लूपार क्षेत्र की राजनीति से भी पुराना संबंध रहा है। उनके ससुर के बड़े भाई मार्कण्डेय चंद धुरियापार क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और प्रदेश सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।
चिल्लूपार में बसपा का रहा है प्रभाव
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। यह क्षेत्र लंबे समय तक अलग-अलग दलों के मजबूत नेताओं का राजनीतिक आधार रहा है। यहां बसपा को भी कई बार महत्वपूर्ण सफलता मिली है। वर्ष 2007 और 2012 में बसपा के टिकट पर राजेश त्रिपाठी विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2017 में हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी ने बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया।
ऐसे में अस्मिता चंद का बसपा में शामिल होना पार्टी के लिए चिल्लूपार में संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या BSP से मिल सकता है टिकट?
अस्मिता चंद के बसपा में शामिल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में चिल्लूपार से उम्मीदवार बनाएगी?
फिलहाल बसपा की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, क्षेत्र में पारिवारिक प्रभाव और भाजपा में लंबे समय तक सक्रिय रहने को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं के बीच इस संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है।
अस्मिता चंद के पार्टी बदलने से एक बात स्पष्ट है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चिल्लूपार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। अब नजर इस बात पर होगी कि बसपा उन्हें चुनावी मैदान में उतारती है या पार्टी के भीतर उन्हें कोई अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है।