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रूस में होने का दावा, बिहार में दर्ज हुई FIR; किशनगंज निवासी ने निष्पक्ष जांच की मांग की

Published on: July 30, 2026
Claims to be in Russia
जागृत भारत,किशनगंज : बिहार के किशनगंज जिले के एक निवासी ने दावा किया है कि नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में उसके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है, जबकि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है। इस दावे के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
किशनगंज निवासी मोहम्मद सदाकत ने रूस से एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका नाम उस मामले में दर्ज किया गया है, जिसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। सदाकत का कहना है कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहे हैं और विरोध प्रदर्शन के दौरान बिहार में मौजूद ही नहीं थे।
वीडियो में सदाकत कहते हैं, “मैं पिछले चार महीने से रूस में हूं। फिर मेरे खिलाफ बिहार में एफआईआर कैसे दर्ज हो गई? मेरी निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि मैं मौके पर मौजूद नहीं था तो मेरा नाम प्राथमिकी से हटाया जाए।” उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, इस दावे पर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। समाचार एजेंसी द्वारा संपर्क किए जाने पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक हरि मोहन शुक्ला ने न तो सदाकत के दावे की पुष्टि की और न ही उसका खंडन किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कोई शिकायत है, तो वह पुलिस से संपर्क कर अपनी बात रख सकता है।
एसपी शुक्ला ने कहा, “प्रदर्शनों से संबंधित जिन लोगों को कोई शिकायत है, वे उसके निवारण के लिए पुलिस से संपर्क करें।” उन्होंने वायरल वीडियो पर कोई अलग टिप्पणी नहीं की।
इस बीच यह भी उल्लेखनीय है कि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए सदाकत के दावों की सत्यता की आधिकारिक जांच या पुष्टि अभी बाकी है।
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 26 जुलाई को सुबह 6 बजे से पहले हुई घटनाओं के संबंध में दर्ज सभी प्राथमिकी, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने यह भी कहा है कि इन मामलों में गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को तत्काल रिहा किया जाएगा। बिहार बंद के दौरान कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें लगभग आधे नाबालिग बताए गए थे। सरकार के फैसले के बाद कई छात्र नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को रिहा भी कर दिया गया। इनमें तेज प्रताप यादव का नाम भी शामिल रहा। वहीं, कुछ वामपंथी दलों ने विधायक संदीप सौरभ की रिहाई न होने पर नाराजगी व्यक्त की थी।
फिलहाल मोहम्मद सदाकत के मामले में पुलिस की ओर से कोई अलग आधिकारिक स्पष्टीकरण या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

इसे भी पढ़ें : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान, विपक्ष ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल


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