बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य की राजनीति में महिला मतदाता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं। यही वजह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमे महिलाओं को लुभाने के लिए नई-नई योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं।
शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की। इससे पहले 26 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसी योजना के तहत 75 लाख महिलाओं के खाते में राशि भेजी थी।
अब तक इस योजना के तहत कुल 1 करोड़ महिलाओं को 10,000 करोड़ रुपये का लाभ दिया जा चुका है। योजना के तहत 18 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को अपने पसंद का व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 8 अक्टूबर 2025 को बाकी योग्य महिलाओं के खाते में भी राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
आज 1, अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ से ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की 25 लाख लाभुक महिलाओं को 10 हजार रुपये प्रति लाभुक की दर से 2500 करोड़ रुपये की राशि का अंतरण किया।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का शुभारंभ 26… pic.twitter.com/XWa5EnZ9WC
— Nitish Kumar (@NitishKumar) October 3, 2025
महिला वोटरों पर राजनीतिक दलों की निगाह
बिहार में जनवरी 2025 तक महिला मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं का 48% थी। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में महिलाओं की वोटिंग दर पुरुषों से लगातार अधिक रही है।
2024 लोकसभा चुनाव: महिलाओं की भागीदारी 59.45%, पुरुषों की 53%
2019 लोकसभा चुनाव: महिलाओं की भागीदारी 59.58%, पुरुषों की 54.09%
2015 विधानसभा चुनाव: महिलाओं की भागीदारी 60.48%, पुरुषों की 53.32%
2010 विधानसभा चुनाव: महिलाओं की भागीदारी 54.49%, पुरुषों की 51.12%
इसी वजह से राजनीतिक दल अब महिलाओं को चुनावी टिकट देने और विशेष योजनाओं की घोषणा करने पर जोर दे रहे हैं।
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महिलाओं की भूमिका और दलों की रणनीति
2020 विधानसभा चुनाव में कुल 62 महिला प्रत्याशी मैदान में उतरीं, जिनमें से 26 ने जीत दर्ज की।
बीजेपी ने 13 महिलाओं को टिकट दिया था, जिनमें 9 विजयी हुईं।
जेडीयू ने 22 टिकट दिए, जिनमें से 6 जीतीं।
आरजेडी ने 16 उम्मीदवार उतारे, 7 विजयी हुईं।
कांग्रेस ने 7 टिकट दिए, जिनमें 4 ने जीत दर्ज की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाता जातिगत आधार से ऊपर उठकर मतदान करती हैं, इसलिए वे निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
विपक्ष की रणनीति
महागठबंधन (राजद और कांग्रेस) ने “माई बहिन सम्मान योजना” की घोषणा की है, जिसके तहत सरकार बनने पर गरीब और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देने का वादा किया गया है।
इसी तरह, प्रशांत किशोर की नई पार्टी जन सुराज पार्टी ने घोषणा की है कि वह विधानसभा की 243 सीटों में से 40 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट देगी। पार्टी ने 9 अक्टूबर को अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी करने का ऐलान किया है।
जिविका दीदी और महिला समूहों की ताकत
बिहार में 10.75 लाख महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) सक्रिय हैं, जिन्हें जिविका दीदी कहा जाता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ये समूह जेडीयू और महिलाओं के बीच मजबूत कड़ी का काम करते हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
चुनावी तैयारी
इसी बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त शुक्रवार को पटना पहुंचे और दो दिन तक राज्य की चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। उनके दिल्ली लौटने के बाद चुनाव की तिथियों की घोषणा होने की संभावना है। चुनाव परिणाम आने के बाद 22 नवंबर 2025 तक नई सरकार का गठन होना है।
👉 साफ है कि इस बार बिहार की सियासत में महिलाओं की भागीदारी और उनकी पसंद ही चुनावी समीकरण तय करने वाली है।
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