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तीस्ता परियोजना पर चीन-बांग्लादेश की बढ़ी साझेदारी, भारत की रणनीतिक चिंताएं तेज

Published on: June 30, 2026
China-Bangladesh on Teesta project
जागृत भारत,ढाका : बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात के बाद दोनों देशों ने तीस्ता नदी परियोजना पर सहयोग आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस परियोजना के तहत बांग्लादेश नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और भूमि क्षरण रोकने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य करना चाहता है। लंबे समय तक भारत के साथ इस परियोजना पर चर्चा के बाद अब बांग्लादेश ने चीन के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार खलिलुर रहमान ने बताया कि दोनों देशों ने तीस्ता परियोजना के लिए संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन (जॉइंट फिजिबिलिटी स्टडी) को तेज करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यदि अध्ययन परियोजना को व्यवहारिक साबित करता है, तो चीन इसके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा।
रहमान के अनुसार, चीन एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में भी बांग्लादेश की सहायता करेगा। इसके तहत चीनी विशेषज्ञ जल संसाधन योजना, नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, जल प्रवाह के आकलन और नदी पुनर्जीवन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे।
इस बीच, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसे बाहरी प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि तीस्ता परियोजना बांग्लादेश के विकास और जनकल्याण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें चीन सहयोग देने के लिए तैयार है।
तीस्ता परियोजना का स्थान भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के निकट होने के कारण इसे रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह इलाका सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे “चिकन नेक” भी कहा जाता है, के करीब स्थित है। यही कॉरिडोर पश्चिम बंगाल को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस परियोजना में बढ़ती भागीदारी पर भारत की करीबी नजर रहेगी। उनका कहना है कि नदी प्रबंधन परियोजनाओं के साथ-साथ इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, चीन और बांग्लादेश दोनों का कहना है कि यह सहयोग विकास और जल संसाधन प्रबंधन तक सीमित है।

इसे भी पढ़ें : होर्मुज हमले के बाद फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी कार्रवाई पर तेहरान की कड़ी चेतावनी


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