जागृत भारत,नई दिल्ली : अयोध्या के भगवान श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी देशवासियों की आस्था के साथ बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमित कार्रवाई और इस्तीफों के जरिए मामले की लीपापोती कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें
जयराम रमेश ने मामले में पार्टी की ओर से चार मांगें रखीं—
- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, संतों और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित किया जाए।
- मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी के बजाय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
- राम मंदिर के लिए नकद और वस्तु के रूप में मिले सभी दान और चढ़ावे का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दें।
पवन खेड़ा ने भी उठाए सवाल
इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के कामकाज और निर्णयों को लेकर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस के कई नेता पहले ही राम मंदिर के दर्शन कर चुके हैं और कुछ ने मंदिर में दान भी दिया है, लेकिन इससे ट्रस्ट से जुड़े विवाद समाप्त नहीं हो जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भाजपा और आरएसएस पर साधा निशाना
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि राम मंदिर परियोजना भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी है और इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर चोरी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों और मांगों पर खबर लिखे जाने तक केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
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