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कुशीनगर में पहले दिन 4 कैनसैट सफलतापूर्वक लॉन्च, दूसरे दिन 20 और लॉन्च होंगे; 600 युवा वैज्ञानिक दिखा रहे अपना हुनर

Published on: October 28, 2025
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कुशीनगर। तमकुहीराज के जीरो बंधा स्थित जंगलपट्टी गांव में सोमवार से राष्ट्रीय इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री/कैनसैट इंडिया स्टूडेंट कंपटीशन 2024-25 का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता मंगलवार को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक जारी रही, जिसमें देशभर से आए छात्रों द्वारा कुल 20 कैनसैट लॉन्च किए जाएंगे।

कैनसैट क्या है
कैनसैट एक छोटा शैक्षिक उपग्रह मॉडल है, जिसका आकार लगभग एक सोडा कैन जितना होता है। इसे छात्रों को उपग्रह डिजाइन और अंतरिक्ष मिशन की मूल अवधारणाओं का व्यावहारिक अनुभव देने के लिए विकसित किया गया है। छोटे मॉडल रॉकेट से लगभग एक किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजे जाने के बाद यह पैराशूट की मदद से नीचे उतरते हुए तापमान, दबाव, ऊंचाई और जीपीएस डेटा जैसी जानकारियां एकत्र करता है।

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पहले दिन की सफलताएँ
प्रतियोगिता के पहले दिन देशभर से आए युवा वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए चार कैनसैट सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए। इस अवसर पर इन-स्पेस निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि उत्तर भारत में पहली बार एक साथ चार कैनसैट की सफल लॉन्चिंग हुई।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं
कैनसैट को वाहन से वर्किंग एरिया तक ले जाया गया और सुरक्षा के मद्देनजर लॉन्चिंग पैड से लगभग सवा किलोमीटर का एरिया आरक्षित किया गया। राम जानकी मंदिर के पास दर्शक दीर्घा बनाई गई थी। ऑब्जर्वेशन एरिया में जूरी सदस्य और लॉन्चिंग टीम एलईडी स्क्रीन के माध्यम से गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे। लॉन्च साइट की निगरानी कुल आठ हाई-क्वालिटी कैमरों से की गई।

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छठ पर्व के कारण समायोजन
छठ पर्व के कारण पहले दिन निर्धारित 10 कैनसैट में से केवल चार ही लॉन्च किए गए, जो शत-प्रतिशत सफल रहे। शेष छह कैनसैट आज लॉन्च किए जाएंगे। लॉन्च किए गए कैनसैट लगभग 10 मिनट के अंतराल पर प्रक्षेपित किए गए, जिससे दर्शकों और वैज्ञानिकों को हर बार रोमांच और गौरव का अनुभव मिला।

प्रतिभागियों की संख्या और छात्राओं की भागीदारी
इस प्रतियोगिता में देश के 47 कॉलेजों से आए कुल 600 प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें 133 छात्राएं भी हैं। छात्राओं ने अपने बनाए हुए कैनसैट मॉडल्स की तकनीकी जटिलताओं को समझा और उन्हें सफलतापूर्वक लॉन्च कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

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पुरस्कार और प्रमाण पत्र
प्रतियोगिता में विजेता टीमों को रॉकेट्री और कैनसैट कंपटीशन के लिए जूरी की ओर से पांच-पांच ट्रॉफी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जो उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज होंगे।

स्थानीय सांसद का योगदान
देवरिया लोकसभा क्षेत्र से सांसद शशांक मणि ने इस कार्यक्रम के लिए सक्रिय प्रयास किए। उनका मानना है कि यह क्षेत्र भविष्य में वैज्ञानिक और तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरेगा।

राष्ट्रीय वैज्ञानिक महाकुंभ 30 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें शेष 67 कैनसैट और रॉकेट मॉडल्स लॉन्च किए जाएंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को व्यावहारिक अनुभव और मंच प्रदान करना है।

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