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पहलगाम हमले पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था करारा जवाब: मोहन भागवत

Published on: October 3, 2025
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार (2 अक्टूबर 2025) को नागपुर स्थित मुख्यालय से संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिए अपने संबोधन में कहा कि अप्रैल में हुए पाहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए एक करारा और निर्णायक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने न केवल देश की राजनीतिक नेतृत्व की दृढ़ता को साबित किया, बल्कि हमारी सेनाओं की वीरता और जनता की एकजुटता को भी उजागर किया।

पाहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल को हुए पाहलगाम आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को गहरे सदमे और आक्रोश में डाल दिया। श्री भागवत ने कहा कि इस हमले के बाद भारत सरकार की रणनीतिक प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने नेतृत्व की दृढ़ता, सेना की युद्ध तत्परता और समाज की एकजुटता का परिचय दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि कौन-सा देश भारत का सच्चा मित्र है और संकट की घड़ी में कौन हमारे साथ खड़ा है।”

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अंतरराष्ट्रीय समर्थन और चेतावनी

भागवत ने कहा कि इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत को अपनी सुरक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत करते रहना होगा और साथ ही वैश्विक मित्रता को भी बनाए रखना होगा। उन्होंने पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की अस्थिर परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसक विद्रोह कभी सकारात्मक परिवर्तन नहीं लाते। “लोकतांत्रिक मार्ग ही परिवर्तन का सही रास्ता है। हिंसा से केवल अराजकता फैलती है और बाहरी ताकतों को हस्तक्षेप का अवसर मिलता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ऐसे आंदोलनों को “व्यवस्था की अराजक व्याकरण” कहा करते थे।

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर

अमेरिका की टैरिफ नीति और अंतरराष्ट्रीय दबावों का उल्लेख करते हुए भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “स्वदेशी और स्वावलंबन का कोई विकल्प नहीं है।”

उन्होंने बढ़ती आर्थिक असमानता, पर्यावरण संकट और शोषण की प्रवृत्तियों को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि सामाजिक समरसता और समानता से ही देश की मजबूती कायम रह सकती है।

सभी समुदायों के सम्मान पर बल

भागवत ने कहा कि भारत की परंपरा सभी को अपनाने और स्वीकार करने की है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की आस्था, प्रतीक और पूजा स्थलों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सड़क पर ताकत दिखाना और हिंसा करना राष्ट्रहित के लिए खतरनाक है।

नक्सलवाद पर टिप्पणी

उन्होंने केंद्र सरकार की नक्सलवाद पर नियंत्रण की प्रशंसा की और कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना की जरूरत है, जिसमें न्याय, विकास, सद्भाव और मानवीय दृष्टिकोण को शामिल किया जाए।

मोदी और दलाई लामा की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भागवत के भाषण की सराहना करते हुए लिखा—
“परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का प्रेरणादायक संबोधन, जिसमें राष्ट्र निर्माण में RSS के योगदान और भारत की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही गई।”

वहीं तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने संघ के शताब्दी वर्ष पर बधाई दी और कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने शिक्षा, समाजसेवा और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्यों में सराहनीय योगदान दिया है।

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