नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आगामी 5 दिसंबर 2025 को भारत यात्रा पर आ रहे हैं। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन (Annual India-Russia Summit) में भाग लेंगे। सूत्रों ने गुरुवार को इस यात्रा की पुष्टि की।
यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि पुतिन की यह भारत यात्रा 2021 के बाद पहली होगी। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन भारत नहीं आए थे।
तेल आयात और वैश्विक दबाव
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र हमेशा से प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। हालांकि हाल के दिनों में रूस से भारत का तेल आयात 16% घटा है। सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट पिछले साल की तुलना में दर्ज की गई। माना जा रहा है कि लगातार तीन वर्षों तक सस्ते दामों पर रूस से तेल आयात बढ़ाने के बाद अब भारत तेल आपूर्ति के अन्य स्रोतों की ओर भी रुख कर रहा है।
यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने 25% पेनल्टी टैरिफ लगाया है और यूरोपीय संघ ने भी रूस पर प्रतिबंध लागू कर रखे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होने की संभावना है।
उच्चस्तरीय तैयारी
पुतिन की यात्रा से पहले रूसी उप प्रधानमंत्री दिमित्री पत्रुशेव पिछले सप्ताह दिल्ली आए थे। उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात कर कृषि व्यापार और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
माना जा रहा है कि शिखर सम्मेलन से पहले रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव भी दिल्ली आ सकते हैं ताकि दोनों देशों के बीच होने वाले समझौतों का एजेंडा तय किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच हाल के महीनों में कई बार बातचीत हो चुकी है—
1 सितंबर को तियानजिन में SCO सम्मेलन के दौरान आमने-सामने मुलाकात
8 अगस्त और 17 सितंबर को टेलीफोन पर बातचीत
इन बातचीतों में मोदी ने पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया था और कहा था कि वे उन्हें “इस वर्ष के अंत में दिल्ली में स्वागत करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं”।
संभावित एजेंडा
भारत-रूस शिखर सम्मेलन में निम्न मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है:
रणनीतिक साझेदारी और रक्षा सहयोग
ऊर्जा और व्यापार संतुलन
कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा परियोजनाएँ
यूक्रेन युद्ध और उसके वैश्विक प्रभाव
अमेरिकी दबाव के बीच रूस से तेल आयात का भविष्य
निष्कर्ष
पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि भारत ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक सहयोग में रूस के साथ किस हद तक खड़ा रहेगा और पश्चिमी दबावों को किस तरह संतुलित करेगा।
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