जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए उपस्थिति व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने सभी परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों की उपस्थिति को पारदर्शी बनाना और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है।
एक घंटे के भीतर दर्ज करनी होगी उपस्थिति
नए आदेश के अनुसार, विद्यालय शुरू होने के एक घंटे के भीतर प्रत्येक शिक्षक को अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी। इसके बाद ऑनलाइन सिस्टम लॉक हो जाएगा और उपस्थिति दर्ज नहीं की जा सकेगी। यह जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक की होगी, और यदि वे असमर्थ हों तो किसी अन्य शिक्षक को यह दायित्व दिया जाएगा।
नेटवर्क समस्या पर ऑफलाइन सुविधा उपलब्ध
प्रदेश के कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहाँ इंटरनेट की समस्या रहती है। इस चुनौती को देखते हुए शासन ने स्पष्ट किया है कि नेटवर्क बाधित होने पर हाजिरी ऑफलाइन दर्ज की जाएगी, जो बाद में नेटवर्क आने पर ऑनलाइन सिस्टम में ऑटोमेटिक सिंक हो जाएगी।
बिना पक्ष सुने शिक्षक पर नहीं होगी कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि अनुपस्थिति के मामले में—
बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए
और शिक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना किसी शिक्षक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पहले भी हुआ था आदेश, विरोध में स्थगित
जुलाई 2024 में भी यह व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन शिक्षकों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। इस पर विभाग ने एक समिति गठित की जिसमें स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, CBSE के पूर्व चेयरमैन और शिक्षक प्रतिनिधि शामिल थे। 6 नवंबर की बैठक में समिति की सिफारिश पर यह निर्णय फिर लागू किया गया है।
शिक्षक संगठनों ने उठाई आपत्ति
शिक्षक नेताओं का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर विचार किए बिना डिजिटल अटेंडेंस लागू करना अनुचित है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
ईएल व सीएल की बेहतर सुविधा
आधे दिन की छुट्टी
मेडिकल और सामूहिक बीमा
गृह जिले में तैनाती
गैर-शैक्षिक कार्यों से मुक्ति
उन्होंने इस आदेश को लागू करने से पहले इन मांगों पर निर्णय की आवश्यकता बताई है।
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