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कर्ज के बोझ तले दबी जिंदगी: देवरिया में लोन की किस्त न चुका पाने से परेशान ट्रक मालिक ने फंदा लगाकर की खुदकुशी

Published on: November 3, 2025
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जागृत भारत | देवरिया(Deoria): उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बघौचघाट क्षेत्र में कर्ज से परेशान एक ट्रक मालिक ने आत्मघाती कदम उठा लिया है। अहिरौली टोला निवासी इस ट्रक मालिक ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। लोन पर गाड़ी लेने के बाद वह लगातार किस्तें जमा न कर पाने के कारण गहरे तनाव में था। इस दुखद घटना ने एक बार फिर छोटे व्यवसायियों पर बढ़ते आर्थिक दबाव और उसके भयावह परिणामों को सामने ला दिया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


तनाव में था मिथिलेश, खुद चलाता था अपनी गाड़ी

बघौचघाट थाना क्षेत्र के अहिरौली टोला के रहने वाले मिथिलेश प्रसाद (35) पुत्र ध्रुव प्रसाद न केवल अपनी ट्रक के मालिक थे, बल्कि उसे खुद ही चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। ट्रक को लोन पर लिया गया था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण मिथिलेश लगातार उसकी मासिक किस्तें (EMI) जमा नहीं कर पा रहे थे। इसी वित्तीय तनाव ने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया था।

खाना खाने के बहाने बुलाया छत पर, बेटी ने देखा खौफनाक मंजर

घटना शनिवार की है। मिथिलेश प्रसाद शनिवार को घर आए और अपनी पत्नी से जल्दी खाना बनाने को कहा, यह कहते हुए कि उन्हें वापस गाड़ी लेकर जाना है। जब खाना तैयार हो गया, तो उनकी बड़ी बेटी उन्हें छत पर बने कमरे में बुलाने गई।

कमरे में पहुंचते ही बेटी ने जो मंजर देखा, उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने देखा कि कमरे की सरिया से अपने गमछे का फंदा बनाकर मिथिलेश ने खुदकुशी कर ली है। बेटी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर परिवार के बाकी सदस्य भागे-भागे ऊपर पहुँचे।

परिजनों ने तुरंत आसपास के लोगों को इस दुखद घटना की सूचना दी और फिर पुलिस को सूचित किया गया। बघौचघाट पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आवश्यक कानूनी कार्यवाही पूरी की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

देवरिया में कर्ज से परेशान ट्रक मालिक का यह कदम समाज में बढ़ते वित्तीय दबाव और तनाव की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मिथिलेश प्रसाद की आत्महत्या यह बताती है कि कैसे एक छोटे व्यवसाय या वाहन पर निर्भर परिवारों के लिए लोन की किस्तें एक असहनीय बोझ बन जाती हैं। यह घटना सरकारों और वित्तीय संस्थानों को इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों के लिए तनाव-मुक्त समाधान और सपोर्ट सिस्टम कैसे तैयार किया जाए, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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