जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। उत्तर प्रदेश में जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पा रहा है, उनके लिए सामान्य निवास प्रमाणपत्र (General Residence Certificate) अब मान्य नहीं होगा। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि एसआईआर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए केवल तय दस्तावेजों को ही स्वीकार किया जाएगा।
आंवला की अनामिका को मिला नोटिस, सामान्य निवास प्रमाणपत्र अस्वीकृत
बरेली जिले के आंवला क्षेत्र की रहने वाली अनामिका (परिवर्तित नाम) को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया, क्योंकि उनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैप नहीं हो सका। बुधवार को हुई नोटिस की सुनवाई के दौरान अनामिका की ओर से सामान्य निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसे स्वीकार करने से साफ इन्कार कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) ने विनम्रतापूर्वक बताया कि चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश हैं कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र को एसआईआर में मान्य नहीं किया जाएगा। इसके बाद अनामिका को अगली सुनवाई की तारीख दे दी गई।
पूरे प्रदेश में मतदाताओं के सामने खड़ी हुई समस्या
यह समस्या सिर्फ मधु तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में आम मतदाता इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी 13 मान्य दस्तावेजों की सूची में छठे नंबर पर “सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र” को मान्यता दी गई है।
हालांकि, एक जिलाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तर प्रदेश में अब स्थायी या मूल निवास प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था व्यावहारिक रूप से नहीं है। वर्तमान में तहसीलों से केवल सामान्य निवास प्रमाणपत्र ही जारी किया जाता है, जिसे छात्रवृत्ति, पेंशन और प्रदेश सरकार की लगभग सभी योजनाओं में मान्यता प्राप्त है।
स्थायी निवास प्रमाणपत्र नहीं बनता तो आम लोग क्या करें?
इस स्थिति में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब वर्षों से प्रदेश में रह रहे लोगों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी ही नहीं किया जाता, तो वे एसआईआर प्रक्रिया में अपने नाम को कैसे साबित करें। कई लेखपालों ने भी यह स्वीकार किया है कि तहसील स्तर पर अब सिर्फ सामान्य निवास प्रमाणपत्र ही बनाया जाता है।
वहीं स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र स्वीकार न किया जाए, और इसमें स्थानीय प्रशासन के स्तर पर कोई ढील संभव नहीं है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा का बयान
इस पूरे मामले पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट कहा कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र किसी स्थान पर महज 5–6 महीने रहने पर भी जारी हो जाता है, जिससे एसआईआर का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न मिलने पर नोटिस के जवाब में जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में स्थायी निवास प्रमाणपत्र शामिल है, लेकिन सामान्य निवास प्रमाणपत्र नहीं। इसी कारण सामान्य निवास प्रमाणपत्र को मान्य नहीं किया जा रहा है।
एसआईआर में ये दस्तावेज होंगे मान्य
एसआईआर प्रक्रिया के तहत निम्नलिखित दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा—
केंद्र/राज्य सरकार/पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश
01 जुलाई 1987 से पहले जारी सरकारी/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू का पहचान पत्र या अभिलेख
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र
पासपोर्ट
मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाणपत्र
सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाणपत्र
वन अधिकार प्रमाणपत्र
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या अन्य जाति प्रमाणपत्र
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू हो)
राज्य या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर
सरकार द्वारा जारी भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र
आधार के लिए आयोग के पत्र संख्या 23/2025-ईआरएस/खंड ॥ दिनांक 09.09.2025 के निर्देश लागू
बिहार एसआईआर की मतदाता सूची का अंश (01.07.2025 की संदर्भ तिथि के अनुसार)
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1 thought on “एसआईआर में बड़ा बदलाव: यूपी में सामान्य निवास प्रमाणपत्र अमान्य, 2003 की वोटर लिस्ट से बाहर वालों को देने होंगे ये दस्तावेज”