जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मदरसों में विदेश से फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला हाल ही में सामने आई शिकायतों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि जिन मदरसों की फंडिंग, संचालन और गतिविधियां स्पष्ट नहीं हैं, उनकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।
लखनऊ के 100 से अधिक मदरसे भी जांच के दायरे में
इस जांच के तहत राजधानी लखनऊ के भी 100 से अधिक मदरसे शामिल हैं, जिनमें कई ऐसे मदरसे हैं जो लंबे समय से बिना किसी मान्यता के संचालित हो रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इन मदरसों पर सरकारी निगरानी या नियंत्रण नहीं है, जिससे इनकी गतिविधियों और वित्तीय स्रोतों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
दिल्ली बम धमाकों के कनेक्शन के बाद एजेंसियां सतर्क
दिल्ली में हुए बम धमाकों के मामले में लखनऊ से जुड़े कनेक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियां पहले से ही सक्रिय थीं। व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क की जांच के साथ-साथ अवैध मदरसों में रहने वाले बाहरी छात्रों की भी जानकारी जुटाई जा रही थी। इसी दौरान कुछ मदरसों में विदेश से फंडिंग की शिकायतें मिलीं, जिसके बाद सरकार ने सख्ती बढ़ाते हुए प्रदेशव्यापी जांच का आदेश दिया।
एटीएस को सौंपी गई 4000 मदरसों की सूची
सूत्रों के मुताबिक एटीएस को पूरे प्रदेश से लगभग 4000 मदरसों की सूची दी गई है। जांच एजेंसियां इन मदरसों के संचालकों, बैंक खातों और फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच करेंगी। अधिकारियों का मानना है कि कुछ मामलों में पड़ोसी देशों से भी फंडिंग मिलने की आशंका है, जिसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता है।
नेपाल सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों के बाद पहले भी हुई थी जांच
करीब दो वर्ष पहले नेपाल सीमा के पास कुछ मदरसों में संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद भी सरकार ने व्यापक जांच कराई थी। उस समय संयुक्त टीम की जांच में लखनऊ के 111 मदरसों की जानकारी सामने आई थी, जिनके पास किसी प्रकार की मान्यता या पंजीकरण नहीं था। यह मदरसे विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और संगठनों द्वारा संचालित किए जा रहे थे।
फंडिंग और छात्रों की जानकारी भी नहीं थी स्पष्ट
पूर्व जांच में यह भी पाया गया था कि कई मदरसों के पास अपनी आय के स्रोतों का स्पष्ट विवरण नहीं था। बच्चों की संख्या, उनकी पृष्ठभूमि और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे थे। कई संस्थानों ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि उन्हें आर्थिक सहायता कहां से मिल रही है।
गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच के दौरान यदि किसी भी तरह की अनियमितता, अवैध फंडिंग या देश विरोधी गतिविधियों का संकेत मिलता है तो संबंधित मदरसों और संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना ही इस जांच का मुख्य उद्देश्य है।
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