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ओवरलोड ट्रकों से करोड़ों की वसूली का खुलासा: हर महीने 2–2.5 करोड़ की ‘काली कमाई’, अफसर-कर्मचारी बने करोड़पति

Published on: November 14, 2025
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जागृत भारत | रायबरेली(Raibareli):  परिवहन विभाग में चल रहे अवैध वसूली के बड़े खेल का पर्दाफाश होने के बाद रायबरेली और फतेहपुर जिलों में हड़कंप मचा हुआ है। वर्षों से चल रही इस व्यवस्था में अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ओवरलोड वाहनों से हर महीने करोड़ों रुपये की काली कमाई की जा रही थी। एसटीएफ की हालिया कार्रवाई में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने विभागीय भ्रष्टाचार की जड़ें हिला दी हैं।


अवैध वसूली से हर महीने होती थी करोड़ों की आमद

एसटीएफ की एफआईआर के अनुसार कुल 141 वाहनों से प्रति माह 10 हजार रुपये की वसूली की जाती थी। इससे सिर्फ इन वाहनों से ही 14 लाख रुपये से अधिक की रकम अधिकारियों और कर्मचारियों की जेब में जाती थी। लेकिन असली खेल इससे कहीं बड़ा था। रायबरेली और फतेहपुर के बीच करीब ढाई हजार ओवरलोड वाहन चलते थे। यदि प्रत्येक वाहन से 10 हजार रुपये की वसूली जोड़ी जाए तो यह रकम करीब 25 करोड़ रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती थी। पूछताछ में आरोपी मोहित सिंह ने भी स्वीकार किया है कि वह पिछले दो वर्षों से इस अवैध वसूली तंत्र का हिस्सा था।


लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें, अचानक हुई बड़ी कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार अवैध वसूली की शिकायतें काफी समय से उच्चाधिकारियों तक पहुंच रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने अचानक जांच दल को सक्रिय किया और एसटीएफ ने रेड कर डाली। इस अप्रत्याशित कार्रवाई से न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि अधिकारियों के होश उड़ गए। बचने का कोई रास्ता नहीं मिला और पूरा नेटवर्क सामने आ गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी इस मामले में कुछ स्पष्ट नहीं बता पाए, जिससे साफ है कि वसूली का नेटवर्क कई स्तरों तक फैला था।


कैसे चलता था वसूली का पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया कि ओवरलोड वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होती थी।

  • बांदा से मौरंग और गिट्टी लदे ट्रक पहले फतेहपुर और फिर रायबरेली की ओर जाते थे।

  • यहां से ये वाहन प्रयागराज, गोरखपुर सहित अन्य जिलों तक भी पहुंचते थे।

इसी रूट में अवैध वसूली का नेटवर्क विकसित हुआ था। गिरोह से जुड़े लोग

  • अधिकारियों को व्हाट्सएप पर ओवरलोड वाहनों की सूची भेजते थे,

  • वाहनों को बिना रोके पास कराया जाता था,

  • और हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच पैसे की वसूली कर कर्मचारियों की मदद से ऊपर तक पहुंचाया जाता था।

इस तरह विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और अवैध नेटवर्क से जुड़े लोग लगातार मालामाल हो रहे थे।

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