FCRA बिल पर लोकसभा में जोरदार हंगामा
लोकसभा में विधेयक पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस ने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की, जबकि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया कि पूरा विपक्ष विधेयक के खिलाफ है।अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इसे लाने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक का अल्पसंख्यकों के खिलाफ होना सही नहीं है। हंगामा बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष ने JPC भेजने के फैसले का किया समर्थन
दिलचस्प बात यह रही कि विधेयक को JPC के पास भेजने के सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष ने भी समर्थन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजना उचित कदम है और विपक्ष आगे भी अपनी रणनीति के तहत अपने मुद्दे उठाता रहेगा। सपा सांसद अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने भी JPC में भेजे जाने का समर्थन किया।
डिंपल यादव ने NGO को लेकर जताई चिंता
डिंपल यादव ने कहा कि यदि विधेयक को JPC के पास भेजा जा रहा है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने आशंका जताई कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं और संगठनों के कामकाज में हस्तक्षेप या दबाव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और बच्चों के लिए काम करने वाले NGOs पर भी सरकार की नीतियों के अनुरूप काम नहीं करने की स्थिति में दबाव बनाया जाता है।
अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों पर भी साधा निशाना
FCRA विधेयक के साथ-साथ अखिलेश यादव ने सरकार के बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर तंज कसा। अखिलेश ने कहा कि सरकार एयरपोर्ट बना रही है, लेकिन उनमें पानी भर जाता है और एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं, जहां गड्ढे दिखाई देते हैं। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट नहीं है तो ऐसे कानूनों को लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।
अब JPC की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
FCRA संशोधन विधेयक अब सीधे कानून बनने के बजाय 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति की जांच से गुजरेगा। समिति विधेयक के प्रावधानों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र में सदन के सामने रखेगी। इसके बाद सरकार और विपक्ष के बीच इस विधेयक को लेकर अगली सियासी लड़ाई देखने को मिल सकती है।