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यूपी हाईकोर्ट का अहम फैसला—बालिग की सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं, दस साल की सजा काट रहे युवक को रिहाई

Published on: January 15, 2026
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जागृत भारत | प्रयागराज(Prayagraj): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी निवासी युवक भगवत कुशवाहा को अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषमुक्त करार देते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने उसे दस साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति अचल सचदेव की एकल पीठ ने युवक की आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि बालिग महिला की सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता

वर्ष 2015 का मामला, सकरार थाना क्षेत्र से जुड़ा है केस

पूरा मामला झांसी के सकरार थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2015 में युवती के परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए पहले उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद युवक भगवत कुशवाहा पर युवती के अपहरण का आरोप लगाया गया।

एफआईआर के अगले दिन रेलवे स्टेशन से हुई थी बरामदगी

एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन पुलिस ने युवती को मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन से युवक के साथ बरामद किया। विवेचना के दौरान युवक के खिलाफ दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी गईं।

ट्रायल कोर्ट ने आठ गवाहों के बयान के बाद सुनाई थी सजा

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के आठ गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके आधार पर कोर्ट ने युवक को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी मानते हुए दस साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने पाया—पीड़िता बालिग और स्वेच्छा से घर छोड़ने वाली थी

अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी और उसने स्वेच्छा से अपना घर छोड़ा था। न तो अपहरण का कोई ठोस प्रमाण मौजूद था और न ही जबरन शारीरिक संबंध का।

मेडिकल रिपोर्ट से भी अभियोजन का दावा साबित नहीं हुआ

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं करती। ऐसे में जब ट्रायल कोर्ट खुद पीड़िता को बालिग मान चुका है, तो उसकी सहमति को नकारना कानूनन सही नहीं ठहराया जा सकता।

सहमति आपराधिक दायित्व तय करने का मूल तत्व—हाईकोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि सहमति आपराधिक दायित्व तय करने का मूल तत्व है और केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बालिग महिला की सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द, युवक की तत्काल रिहाई का आदेश

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और युवक भगवत कुशवाहा को तत्काल रिहा करने का आदेश सुना दिया।

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