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महिला आयोग बनाम जेसीपी विवाद: पुलिस बैकफुट पर, अनीता गुप्ता के कड़े सवालों से बढ़ी हलचल

Published on: November 28, 2025
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): कानपुर में महिला आयोग सदस्य अनीता गुप्ता और संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) विनोद कुमार सिंह के बीच हुआ विवाद शांत होने के बजाय और तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस कमिश्नर ने इसे गलतफहमी बताकर खत्म करने की कोशिश की, लेकिन अनीता गुप्ता ने डीजीपी को पत्र भेजकर जेसीपी पर कठोर कार्रवाई की मांग की, जिससे मामला और भी गर्मा गया है।


पुलिस का रुख बदला, विवाद और गहराया

बर्रा थाने में निरीक्षण के बाद जेसीपी ने पत्र जारी कर निरीक्षण पर आपत्ति जताई थी। पत्र की भाषा पर विपक्ष ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर पत्र वायरल होने के बाद पुलिस बैकफुट पर नजर आई और कमिश्नर रघुबीर लाल ने बयान जारी कर इसे ‘गलतफहमी’ बताया।


अनीता गुप्ता ने डीजीपी को लिखा पत्र

अनीता गुप्ता ने डीजीपी को पत्र भेजकर कई सवाल उठाए और जेसीपी विनोद कुमार सिंह पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है। उनका कहना है कि महिला हेल्प डेस्क का अवलोकन उनके अधिकार क्षेत्र में आता है, और जेसीपी ने गलत आधार पर आपत्ति जताई।


निरीक्षण पर विवाद कैसे शुरू हुआ

मंगलवार को अनीता गुप्ता बर्रा थाने में निरीक्षण के लिए गई थीं। इसके बाद जेसीपी क्राइम एंड हेडक्वार्टर ने पत्र जारी किया, जिसमें निरीक्षण को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया और कई अनुचित शब्दों का प्रयोग किया गया। यह पत्र जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विपक्ष ने इसे अत्यंत आपत्तिजनक बताया।


कमिश्नर ने दोनों पक्षों से की वार्ता

राजनीतिक हलचल बढ़ने पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने अनीता गुप्ता और जेसीपी से बात की।
कमिश्नर ने कहा:

  • महिला आयोग सदस्य किसी शिकायत के समाधान के लिए थाने गई थीं

  • ऐसे भ्रम पत्र की भाषा से उत्पन्न हुए

  • अब दोनों पक्षों में विवाद नहीं है

लेकिन पुलिस का यह बदला हुआ रुख विपक्ष के लिए सवाल खड़े कर रहा है।


अनीता गुप्ता ने पत्र में उठाए सवाल

अनीता गुप्ता ने अपने पत्र में कई बिंदुओं पर सवाल दागे:

  1. कार्य क्षेत्र का निर्धारण किस आधार पर किया गया?
    उन्होंने कहा कि उन्होंने हेल्प डेस्क का अवलोकन किया, थाने का निरीक्षण नहीं।

  2. किस कार्य में व्यवधान आया?
    उन्होंने पूछा कि उनके अवलोकन से पुलिस का कौन सा दैनिक कार्य प्रभावित हुआ।

  3. क्या आयोग सदस्य ‘अनधिकृत व्यक्ति’ हैं?
    पत्र में उन्हें ‘अनधिकृत व्यक्ति’ कहा गया था, जिस पर उन्होंने कड़ा एतराज जताया।

  4. चेतावनी देने का अधिकार किस नियम के तहत?
    उन्होंने सवाल किया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को चेतावनी कैसे दी जा सकती है।

  5. कानपुर में आयोग का कार्य कैसे चलेगा?
    उन्होंने कहा कि पुलिस के रुख से ऐसा प्रतीत होता है कि आयोग का काम बाधित हो सकता है।


पुलिस का बदलता रुख और उठते सवाल

जेसीपी के पत्र में कहा गया था कि निरीक्षण अधिकार क्षेत्र से बाहर है। जबकि पुलिस कमिश्नर ने अब कहा कि कोई भी व्यक्ति शिकायत के समाधान के लिए थाने जा सकता है। इस उलट बयानबाज़ी पर विपक्ष और सवाल उठा रहा है।


सहयोग से ही सुरक्षा संभव: कमिश्नर

कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि आपसी तालमेल और सहयोग से ही महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि अब कोई विवाद शेष नहीं है।


आयोग अध्यक्ष भी हरकत में, लखनऊ में होगी चर्चा

महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने कहा कि वह जल्द ही लखनऊ में अनीता गुप्ता, पुलिस कमिश्नर और संबंधित अधिकारियों को बुलाकर इस प्रकरण पर बातचीत करेंगी। इसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा।

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