जागृत भारत,काबुल : अफगानिस्तान के बदख्शान प्रांत में तालिबान और Afghanistan Freedom Front (AFF) के बीच संघर्ष तेज होने की खबरें हैं। AFF ने एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने जेबक (Jebak) जिले में तालिबान की कुछ चौकियों पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका वाखान कॉरिडोर के निकट स्थित है, जो अफगानिस्तान को चीन से जोड़ता है।
AFF का कहना है कि जेबक क्षेत्र में कई दिनों से लड़ाई जारी है और तालिबान अब तक उन इलाकों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाया है, जिन पर विद्रोही समूह ने कब्जा करने का दावा किया है।
तालिबान ने दावों को खारिज किया
तालिबान प्रशासन के बदख्शान प्रांत के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि जेबक में संघर्ष हुआ है, लेकिन AFF के क्षेत्र पर कब्जे और बड़े सैन्य नुकसान के दावों को खारिज किया है। प्रांतीय गवर्नर ने विद्रोही समूहों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि तालिबान किसी भी विद्रोह से निपटने में सक्षम है।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
AFF ने दावा किया है कि उसने काबुल से बदख्शान जा रहे तालिबान के एक सैन्य काफिले पर हमला किया, जिसमें कई तालिबानी लड़ाके मारे गए और घायल हुए। समूह ने यह भी कहा कि जवाबी कार्रवाई के बाद तालिबान को कुछ क्षेत्रों से पीछे हटना पड़ा।
दूसरी ओर, तालिबान का कहना है कि उसने पाकिस्तान के चित्राल क्षेत्र से घुसपैठ करने वाले पांच उग्रवादियों को मार गिराया और शेष हमलावर सीमा पार वापस लौट गए। तालिबान ने AFF के नियंत्रण संबंधी दावों की पुष्टि नहीं की है।
AFF कौन है?
Afghanistan Freedom Front (AFF) का गठन वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद हुआ था। यह संगठन मुख्य रूप से पूर्व अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के कुछ सदस्यों और तालिबान विरोधी तत्वों से जुड़ा माना जाता है। इसका नेतृत्व पूर्व अफगान सेना प्रमुख यासिन जिया के हाथ में बताया जाता है।
पाकिस्तान की भूमिका पर दावे
कुछ विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि AFF को पाकिस्तान से परोक्ष समर्थन मिल सकता है। हालांकि, इस दावे की सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही पाकिस्तान ने ऐसे किसी समर्थन को स्वीकार किया है।
ध्यान दें: इस संघर्ष से जुड़ी अधिकांश जानकारी युद्धरत पक्षों के बयानों और दावों पर आधारित है। स्वतंत्र स्रोतों से सभी दावों की पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए हताहतों की संख्या, क्षेत्रीय नियंत्रण और बाहरी समर्थन संबंधी दावों को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।
इसे भी पढ़ें : जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दिपके को टाइफाइड, बोले- आंदोलन जारी रहेगा
➤ You May Also Like





Discover more from jagrutbharat.com :: जागृत भारत
Subscribe to get the latest posts sent to your email.












































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































