जागृत भारत,नई दिल्ली : ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की आपूर्ति किए जाने की घोषणा के बाद देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि इसकी नींव कांग्रेस सरकार के दौरान हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते से पड़ी थी।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते हुए लिखा कि ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति की घोषणा ऐसे पेश की जा रही है, मानो यह नई उपलब्धि हो। उन्होंने दावा किया कि यह संभव केवल भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के कारण हुआ, जो 8 अक्टूबर 2008 को प्रभावी हुआ था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस समझौते की शुरुआत जुलाई 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के बीच हुई बातचीत से हुई थी। उनके अनुसार, इसी प्रक्रिया ने भारत के लिए वैश्विक परमाणु व्यापार के रास्ते खोले, जिसके चलते ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से परमाणु ईंधन प्राप्त करने की संभावना बनी।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उस समय संसद के भीतर और बाहर इस परमाणु समझौते का विरोध किया था। कांग्रेस और भाजपा की तुलना करते हुए उन्होंने लिखा कि कांग्रेस देश के लिए “टर्निंग पॉइंट” लाती है, जबकि भाजपा “यू-टर्न” लेने में माहिर है।
इससे पहले भी जयराम रमेश केंद्र सरकार की नई VB-GRAM-G योजना को लेकर आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने एक अर्थशास्त्री के लेख का हवाला देते हुए दावा किया था कि यह योजना मनरेगा के तहत मिले रोजगार के अधिकार को कमजोर करती है। उन्होंने इसे “रोजगार के अधिकार की चोरी” करार दिया था।
हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना और विकास कार्यों की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
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