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नमामि गंगे के 38 साल और 1621 करोड़ खर्च, फिर भी मैली क्यों बह रही गंगा? कानपुर में गहराता प्रदूषण

Published on: January 18, 2026
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जागृत भारत | कानपुर(Kanpur): गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए बीते 38 वर्षों में 1621 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी गंगा मैली ही बह रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों से अब भी सात नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं, जिससे रोजाना 30 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) दूषित पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के नदी में पहुंच रहा है।

माघ मेला के नाम पर अस्थायी उपाय, कागजों में साफ गंगा

माघ मेला को देखते हुए नगर निगम द्वारा बायो-रेमिडिएशन तकनीक से नालों के दूषित पानी को शोधित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। कागजों में भले ही गंगा साफ दिखाई दे, लेकिन मौके पर आज भी गंदा पानी लगातार गंगा में गिर रहा है

नगर आयुक्त ने पकड़ी लापरवाही, अफसरों को फटकार

कुछ दिन पहले नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने खुद निरीक्षण के दौरान लापरवाही पकड़ी थी और मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी। इसके बावजूद हालात में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा है।

गंगा किनारे की बस्तियों से भी बह रहा सीवर

सिर्फ नालों से ही नहीं, बल्कि गंगा किनारे बसी कॉलोनियों और बस्तियों से भी सीवरयुक्त पानी सीधे नदी में मिल रहा है। अनुमान के मुताबिक करीब 40 एमएलडी दूषित पानी रोजाना इन बस्तियों से गंगा में पहुंच रहा है।

अभी भी अधूरे हैं 839 करोड़ के सफाई कार्य

गंगा की सफाई के लिए अभी भी 839 करोड़ रुपये के कार्य शेष हैं। इनमें कुछ परियोजनाएं चल रही हैं, जबकि कुछ के टेंडर होने बाकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना ठोस और नियोजित प्लानिंग के कराए गए कार्यों के कारण गंगा सफाई अभियान को भारी नुकसान पहुंचा है।

पहले सीवर लाइन, बाद में एसटीपी: उलटी योजना बनी बड़ी समस्या

नारामऊ, नानकारी समेत आसपास के इलाकों में पहले सीवर लाइन बिछा दी गई, जबकि दूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए बनियापुरवा में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बाद में बनाया गया। जब इसकी टेस्टिंग हुई तो सामने आया कि सीवर लाइन नाले में बैठ गई है, जिससे पानी एसटीपी तक पहुंच ही नहीं पा रहा था।

एसटीपी की क्षमता और हकीकत में बड़ा अंतर

फिलहाल शहर में सात एसटीपी बन चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 420 एमएलडी दूषित पानी को ट्रीट करने की है। लेकिन वास्तविकता यह है कि केवल 320 एमएलडी पानी ही ट्रीट हो पा रहा है, क्योंकि गंदा पानी एसटीपी तक पहुंच ही नहीं रहा।

गंगा और पांडु नदी में रोज गिर रहा 10 करोड़ लीटर दूषित पानी

आंकड़ों के अनुसार गंगा और पांडु नदी में प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ लीटर दूषित पानी गिर रहा है। स्थिति यह है कि आज भी शहर के करीब 40 प्रतिशत इलाकों में सीवर लाइन डाली ही नहीं गई है

ये नाले आज भी गंगा को कर रहे प्रदूषित

अब भी रामेश्वर नाला, वाजिदपुर नाला, मैस्कर घाट, गोला घाट, डबका नाला, गुप्तार घाट और रानी घाट नाला सीधे गंगा में गिर रहे हैं। नगर निगम इन नालों के पानी को जैविक उपचार से ट्रीट करने का दावा करता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।

जेएनएनयूआरएम योजना में हुआ बड़ा भ्रष्टाचार

गंगा प्रदूषण की कहानी में भ्रष्टाचार भी बड़ी वजह बनकर सामने आया है।
वर्ष 2008 में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्युवल मिशन (JNNURM) के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से लखनपुर सीवेज पंपिंग स्टेशन से बनियापुरवा स्थित 15 एमएलडी एसटीपी तक सीवर लाइन डाली गई।

नाले में दबा दी गई सीवर लाइन, 11 साल बाद खुली पोल

ठेकेदार फर्म सतीश कुमार ने सड़क के नीचे पाइप डालने के बजाय नाले में ही सीवर लाइन डाल दी, जो बाद में मिट्टी भरने से पूरी तरह बंद हो गई। वर्ष 2019 में, यानी करीब 11 साल बाद, जब 15 करोड़ रुपये की लागत से एसटीपी बनियापुरवा चालू किया गया तो पता चला कि प्लांट तक पानी पहुंच ही नहीं रहा

अब 32 करोड़ की नई सीवर लाइन, पुराने दोषियों पर कार्रवाई

इसके बाद अब 32 करोड़ रुपये की लागत से नई सीवर लाइन और सीवरेज पंपिंग स्टेशन का निर्माण कराया जा रहा है। इस पूरे मामले में वर्ष 2008 में तैनात जल निगम के अधिशासी अभियंता मुकेश कुमार और अवर अभियंता ए.के. वार्ष्णेय की भूमिका सामने आई।
वर्ष 2021 में शासन ने जांच समिति गठित की, जिसके बाद ठेकेदार और अभियंताओं पर कार्रवाई की गई।

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